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"Dharam" Barot
manzil kabhi bhi aakhiri hoti nahin
manzil kabhi bhi aakhiri hoti nahin | मंज़िल कभी भी आख़िरी होती नहीं
- "Dharam" Barot
मंज़िल
कभी
भी
आख़िरी
होती
नहीं
इच्छा
सभी
पूरी
मेरी
होती
नहीं
इज़हार
करना
इश्क़
का
तो
है
तुझे
वो
सोचने
से
तो
तेरी
होती
नहीं
- "Dharam" Barot
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सोचकर
अब
शर्म
आती
है
ज़रा
चूम
लेना
होंठ
को
इज़हार
में
Neeraj Neer
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चलो
करके
देखेंगे
इज़हार
अब
की
मुहब्बत
न
होगी
अदावत
तो
होगी
Tiwari Jitendra
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है
समझना
आपको
तो
शे'र
से
इज़हार
समझें
बात
कहने
को
भला
हम
फूल
क्यूँ
तोड़ा
करेंगे
Ankit Maurya
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हम
सेे
फिर
प्यार
का
इज़हार
किया
है
तुमने
ये
तमाशा
तो
कई
बार
किया
है
तुमने
Anjum Rehbar
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तूने
जिस
बात
को
इज़हार-ए-मुहब्बत
समझा
बात
करने
को
बस
इक
बात
रखी
थी
हमने
Ameer Imam
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इज़हार
पे
भारी
है
ख़मोशी
का
तकल्लुम
हर्फ़ों
की
ज़बाँ
और
है
आँखों
की
ज़बाँ
और
Haneef akhgar
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अगर
है
इश्क़
सच्चा
तो
निगाहों
से
बयाँ
होगा
ज़बाँ
से
बोलना
भी
क्या
कोई
इज़हार
होता
है
Bhaskar Shukla
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मिरी
सुब्ह
का
यूँँ
भी
इज़हार
हो
पियाला
हो
कॉफ़ी
का
अख़बार
हो
कोई
जुर्म
साबित
न
हो
उसका
फिर
जो
तेरी
हँसी
में
गिरफ़्तार
हो
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Swapnil Tiwari
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इश्क़
हमारा
चाँद
सितारे
छू
लेगा
घुटनों
पर
आकर
इज़हार
किया
हमने
Darpan
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आज
फिर
इज़हार
करते
हैं
सनम
आपसे
ही
प्यार
करते
हैं
सनम
आपको
क्या
इश्क़
से
परहेज़
है
आप
क्यूँ
इनकार
करते
हैं
सनम
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Divy Kamaldhwaj
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महादेव
ने
है
सिखाया
हमें
तो
रखो
ज़हर
को
कंठ
में,
मत
उबालो
"Dharam" Barot
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रख
ली
मेरी
लाज
होकर
बेक़रार
इश्क़
में
लगती
है
ठोकर
बेक़रार
शे'र
को
भी
करना
था
क़ाबू
में
आज
था
बहुत
सर्कस
में
जोकर
बेक़रार
आप
तो
कहके
चले
जाते
है
दुख
हो
गया
कोई
रो
रोकर
बेक़रार
हर
मुसीबत
झेलने
तैयार
जो
क्या
उन्हें
लगनी
थी
ठोकर
बेक़रार
अब
सताता
डर
घरों
में
चोर
का
रखने
को
सोना
था
लोकर
बेक़रार
देख
कर
मुझको
कसीनो
आया
याद
खेलने
को
खेल
पोकर
बेक़रार
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हर
एक
की
कोई
कहानी
होती
है
जो
कामयाबी
पर
सुनानी
होती
है
यह
मानने
कोई
नहीं
तैयार
पर
मुफ़लिस
की
भी
कोई
कहानी
होती
है
दे
दे
दलीलें
आप
कितनी
ही
मगर
मैने
कहा
होती
है
यानी
होती
है
है
गाँव
सूखे
देश
में
कुछ
आज
भी
सो
उनकी
पहली
प्यास
पानी
होती
है
ये
मत
करे
वो
मत
करे
ये
मत
कहो
जब
रिस्क
लेने
को
जवानी
होती
है
इज़्ज़त
कमाना
बात
है
ये
दूर
यार
मुफ़लिस
को
तो
इज़्ज़त
बचानी
होती
है
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तोड़
देता
सभी
से
रिश्ता
वहम
पाल
मैंने
रखा
अहम
का
वहम
कुछ
नहीं
पास
ये
किसी
का
वहम
पास
सबकुछ
है
ये
भी
इक
था
वहम
टूट
कर
मरना
अच्छा
होगा
क्या
अच्छा
है
वो
मेरा
ही
ऐसा
वहम
ख़ुद-कुशी
रास्ता
नहीं
कभी
भी
ज़िंदगी
जीना
कौन
सा
था
वहम
भावना
में
गए
थे
बह
सारे
सबको
माना
सही
धरम
का
वहम
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"Dharam" Barot
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नहीं
मुमकिन
वही
मुमकिन
करो
तुम
अभी
है
रात
इसको
दिन
करो
तुम
रखो
तुम
ख़्वाहिशों
को
दूर
अपनी
सभी
की
ख़्वाहिशें
मुमकिन
करो
तुम
सुनो
तुम
बातें
बारीकी
से
सबकी
हाँ
ख़ुद
की
मर्ज़ी
से
लेकिन
करो
तुम
सलीके
से
पुरानी
यादों
को
इक
नए
काग़ज़
में
फिर
से
पिन
करो
तुम
किसी
की
भी
मदद
करना
है
अच्छा
किसी
को
भी
बताए
बिन
करो
तुम
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