ishq mudda hai hamaari jaan ka | इश्क़ मुद्दा है हमारी जान का

  - Deep kamal panecha
इश्क़मुद्दाहैहमारीजानका
ख़ूनलेताहैयेउसइंसानका
वोजानेदेपकड़ताभीनहीं
क्याकरूँँमैंउसहसींशैतानका
साथदेहरहालमेंतूमेरा,फिर
नापलूँगा,कदमैंहरतूफ़ानका
पूछताथामैंतुम्हेंक्याक्यालिया
जानेवालेकहतातोअरमानका
हैसुनाईदेतीबसबातेंतिरी
अबबतामैंक्याकरूँँइसकानका
तेरेहोनेसेहैचेहरेपरहँसी
वर्नासबक्यादेखेइसवीरानका
दिललगानेकाहुनरमैंनेदिया
क्याग़ज़बबदलालियाएहसानका
सीनेलगतातूकभीशायदमिरे
फिरताहूँटुकड़ेलिएअरमानका
पासरखनाहैयेख़्वाहिशहैमिरी
एकझुमकाउसपरीकेकानका
इश्क़सबकुछलूटलेताहैमगर
मैंमज़ालेताहूँइसनुक़सानका
क्याबचाहैमुझमेंरुख़सतसेतिरी
नोचोचाहेजिस्ममुझबेजानका
इश्क़इकहीहोताहैऐलानहै
तर्क़करताहूँमैंइसऐलानका
साथमाँगौरीहैं,मेरीमौतपे
दृश्यदेखेंगेसभीशमशानका
  - Deep kamal panecha
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