jaane kitnii shabein jaga hooñ main | जाने कितनी शबें जगा हूँ मैं

  - Deep kamal panecha
जानेकितनीशबेंजगाहूँमैं
नींदकोबतलादोख़फ़ाहूँमैं
पूरीशबसोचमेंगुज़रतीहै
क्यूँफ़क़ततुमकोसोचताहूँमैं
ज़िन्दगीजीनाथोड़ातोसिखादें
देख,अरसेसेमररहाहूँमैं
दिलमेंकोईमुझेनहींरखता
जीयक़ीननबहुतबुराहूँमैं
आपकोशिशजाननेकीकरें
जीतेजीमरनेकीअदाहूँमैं
औरनफ़रतसेदेखोतुममुझको
मेरीजान-ए-जिगरतिराहूँमैं
ज़ख़्मोंसेइतनाप्यारहैमुझको
बे-सबबज़ख़्मढूँढ़ताहूँमैं
ज़िंदाहोजाऊँ,गरवोआएपलट
वर्नाऐसेमराहुआहूँमैं
इसक़दरइश्क़हैमुझेउससेे
चिल्लाचिल्लाकेबोलताहूँमैं
उससेेअपनाकोईनहींमेरा
वास्तेउसकेदूसराहूँमैं
सारेनफ़रतहीकरतेहैमुझसे
हाएरबकीहसींख़ताहूँमैं
  - Deep kamal panecha
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy