tumhaari yaad men aañkhen bhigo raha hooñ main | तुम्हारी याद में आँखें भिगो रहा हूँ मैं

  - Dard Faiz Khan
तुम्हारीयादमेंआँखेंभिगोरहाहूँमैं
मगरज़मानासमझताहैरोरहाहूँमैं
कमालयेहैकिख़ुदअपनेदिलकेतारोंमें
हसीनइश्क़केमोतीपिरोरहाहूँमैं
कटीहैउम्रयेसारीबुतोंकीउल्फ़तमें
मगरअबअपनेगुनाहोंकोधोरहाहूँमैं
मेरेयक़ीनकाइससेहीइम्तिहाँहोगा
भँवरमेंइश्क़केकश्तीडुबोरहाहूँमैं
मिलेतोउसकोनिशानीवोदूँमोहब्बतकी
उठाकेशानेपेअपनेजोढोरहाहूँमैं
ख़यालआबला-पाईहैहरक़दममुझको
सोअपनीराहमेंकाँटेबोरहाहूँमैं
लगारहेहैंवोमेंहदीख़ुशीकीहाथोंमें
सुकूनदिलकामगरफैज़खोरहाहूँमैं
  - Dard Faiz Khan
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy