shaam-e-gham ki agar sehar hoti | शाम-ए-ग़म की अगर सहर होती

  - Dard Faiz Khan
शाम-ए-ग़मकीअगरसहरहोती
ज़िंदगीयूँँबेअसरहोती
तेरेकूचेमेंजोनहींआता
जानेकैसेमेरीगुज़रहोती
हालदिलक्याबताएँहमतुमको
काशउल्फ़तकीइकनज़रहोती
तुमहोतेअगरख़्यालोंमें
उम्रकैसेमेरीबसरहोती
सहलहोतामेरासफ़रइकदिन
तूअगरमेरीहमसेफ़रहोती
फ़ैज़जिसकेलिएतड़पताहै
काशउसकोभीकुछख़बरहोती
  - Dard Faiz Khan
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