na jaane kyuuñ mira ab dil pe ikhtiyaar nahin | न जाने क्यूँ मिरा अब दिल पे इख़्तियार नहीं

  - Dard Faiz Khan
जानेक्यूँमिराअबदिलपेइख़्तियारनहीं
फ़िराक़यारमेंइकपलइसेक़रारनहीं
किसीकेइश्क़मेंख़ुदकोफ़नाजोकरलेता
मुझेभीशहरमेंमिलताकभीवक़ारनहीं
दिलदिमाग़येपढ़ताथाफ़ातिहाकिसपर
मिरेवजूदमेंकोईतोअबमज़ारनहीं
गुलोंमेंरंगहीतुझसेहैइसलिएशायद
बहारजिसकोसमझतेहैंवोबहारनहीं
पड़ाहुआथालहदमेंमगरसुकूनकहाँ
किफैज़मुर्दाबदनमहवेइंतिज़ारनहीं
  - Dard Faiz Khan
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