na jaane kyuuñ mujhe ab KHud pe ikhtiyaar nahin | न जाने क्यूँ मुझे अब ख़ुद पे इख़्तियार नहीं

  - Dard Faiz Khan
जानेक्यूँमुझेअबख़ुदपेइख़्तियारनहीं
फ़िराक़-ए-यारमेंदिलकोकहींक़रारनहीं
कोईभीहालपेमेरेग़म-ज़दाहोगा
मुझेपताहैमिराकोईसोगवारनहीं
येमेरीआँखकेअश्कोंकीख़ुश्कसालीहै
येदिलहैगिर्या-कुनाँचश्मअश्क-बारनहीं
रुसूख़देखकेधोखेमेंतुमजाना
बड़ेहैंलोगमगरसाहिब-ए-वक़ारनहीं
तिरीजोयादहैमदफ़ूनमेरेसीनेमें
मिरावजूदतिरेइश्क़कामज़ारनहीं
गुलोंमेंरंगहीतुझसेहैइसलिएशायद
बहारजिसकोसमझतेहैंवोबहारनहीं
पड़ाहुआथालहदमेंमगरसुकूनकहाँ
कि'फैज़'मुर्दाबदनमहवेइंतिज़ारनहीं
  - Dard Faiz Khan
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