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Chetan
KHud men tasleem hain vafaa karke
KHud men tasleem hain vafaa karke | ख़ुद में तस्लीम हैं वफ़ा करके
- Chetan
ख़ुद
में
तस्लीम
हैं
वफ़ा
करके
क़ैद
काटो
गुनाह
कटता
है
- Chetan
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मिलेगी
क़ैद
से
कैसे
रिहाई
कौन
सोचेगा
यहाँ
तेरे
सिवा
तेरी
भलाई
कौन
सोचेगा
ज़माने
भर
का
तू
सोचेगा
तो
फिर
तेरे
बारे
में
मुझे
तू
ही
बता
दे
मेरे
भाई,
कौन
सोचेगा?
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Siddharth Saaz
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तकल्लुफ़
छोड़कर
आओ
उसे
फिर
से
जिया
जाए
हमारा
बचपना
जो
एल्बमों
में
क़ैद
रहता
है
Shiva awasthi
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जगह
की
क़ैद
नहीं
थी
कोई
कहीं
बैठे
जहाँ
मक़ाम
हमारा
था
हम
वहीं
बैठे
अमीर-ए-शहर
के
आने
पे
उठना
पड़ता
है
लिहाज़ा
अगली
सफ़ों
में
कभी
नहीं
बैठे
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Mehshar Afridi
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जुर्म
में
हम
कमी
करें
भी
तो
क्यूँँ
तुम
सज़ा
भी
तो
कम
नहीं
करते
Jaun Elia
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मुन्सिफ़
हो
अगर
तुम
तो
कब
इंसाफ़
करोगे
मुजरिम
हैं
अगर
हम
तो
सज़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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सज़ा
सच
बोलने
की
यह
मिली
है
सभी
ने
कर
लिया
हम
से
किनारा
Meem Alif Shaz
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मसाइल
तो
बहुत
से
हैं
मगर
बस
एक
ही
हल
है
सहरस
शाम
तक
सर
मेरा
है
बेगम
की
चप्पल
है
मेरे
मालिक
भला
इस
सेे
बुरी
भी
क्या
सज़ा
होगी
मेरा
शादीशुदा
होना
ही
दोज़ख़
की
रिहर्सल
है
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Paplu Lucknawi
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इश्क़
करना
इक
सज़ा
है
क्या
करें
इश्क़
का
अपना
मज़ा
है
क्या
करें
Syed Naved Imam
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रोक
सकता
हमें
ज़िंदान-ए-बला
क्या
'मजरूह'
हम
तो
आवाज़
हैं
दीवार
से
छन
जाते
हैं
Majrooh Sultanpuri
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मेरी
बाँहों
में
बहकने
की
सज़ा
भी
सुन
ले
अब
बहुत
देर
में
आज़ाद
करूँँगा
तुझ
को
Jaun Elia
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यूँँ
तुझे
ढूँढ़ना
हुआ
मुश्किल
तेरी
यादें
ही
बन
गई
हाइल
मेरे
एहसास
थे
तवाज़ुन
में
फिर
हुआ
वो
हयात
में
दाख़िल
आख़िरी
बार
मिलना
बाक़ी
है
हिज्र
मुझ
पर
हुआ
नहीं
नाज़िल
जब
कि
क्या
क्या
नहीं
था
दरिया
में
फिर
भी
प्यासा
ही
रह
गया
साहिल
पहले
हैरान
था
मगर
फिर
मैं
अपनी
बर्बादी
में
हुआ
शामिल
बाढ़
आते
ही
कर
गया
हिजरत
तू
भी
ऐनक
के
जैसे
था
वासिल
जिसको
मिलती
है
वो
बताता
है
इस
सड़क
की
नहीं
कोई
मंज़िल
इतनी
मुश्किल
न
थी
शहंशाही
कोई
भूखा
था
कोई
था
बुज़दिल
एक
काँधा
ज़रूरी
है
सबको
चाहे
मातम
हो
या
कोई
महफ़िल
मेरे
क़ाबिल
नहीं
रही
दुनिया
मुझको
छोड़ा
नहीं
किसी
क़ाबिल
मुझ
में
अफ़सोस
बन
के
बैठी
है
इक
दु'आ
जो
नहीं
हुई
कामिल
चोट
खा
कर
जो
हँस
दिया
था
मैं
मारने
वाला
हो
गया
चोटिल
हाल
ये
है
कि
हाल
को
मेरे
कोस
कर
मर
चुका
है
मुस्तक़बिल
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Chetan
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मैं
जो
दौड़ूँ
ख़िलाफ़
चलते
हैं
ये
नज़ारे
तो
मेरी
मंज़िल
नइँ
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त'अज्जुब
तुझ
सेे
मिलना
था
बिछड़ने
पर
भी
हैरत
है
मसीहा
वो
नहीं
था
मैं
न
वो
हैवान
बन
पाया
Chetan
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जैसा
है
हाल
तब
कहाँ
होगा
उसको
गर
पाया
तो
गुमाँ
होगा
Chetan
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अपनों
को
हारा
है
तग़ाफ़ुल
में
ग़ैरों
से
बातें
बहर
में
होंगी
Chetan
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