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Abhishek Bhadauria 'Abhi'
kisi se dil lagana chahta hooñ
kisi se dil lagana chahta hooñ | किसी से दिल लगाना चाहता हूँ
- Abhishek Bhadauria 'Abhi'
किसी
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
मैं
ख़ुद
को
आज़माना
चाहता
हूँ
- Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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हम
को
किस
के
ग़म
ने
मारा
ये
कहानी
फिर
सही
किस
ने
तोड़ा
दिल
हमारा
ये
कहानी
फिर
सही
Masroor Anwar
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अगर
हमारे
ही
दिल
में
ठिकाना
चाहिए
था
तो
फिर
तुझे
ज़रा
पहले
बताना
चाहिए
था
Shakeel Jamali
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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तो
क्या
ये
हो
नहीं
सकता
कि
तुझ
से
दूर
हो
जाऊँँ
मैं
तुझ
को
भूलने
के
वासते
मजबूर
हो
जाऊँ
सुना
है
टूटने
पर
दिल
सभी
कुछ
कर
गुजरते
हैं
मुझे
भी
तोड़
दो
इतना
कि
मैं
मशहूर
हो
जाऊँ
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SHIV SAFAR
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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हम
तो
ख़ुद-ब-ख़ुद
‘अभी’
एक
तमसील-ए-हुनर
थे
फिर
हमारी
ही
ज़िंदगी
क्यूँँ
बे–हुनर
चली
गई
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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बहुत
ही
ज़ोर
बढ़ते
जा
रहे
हैं
तेरी
ही
ओर
बढ़ते
जा
रहे
हैं
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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क्या
क्या
वो
इंसान
बताया
करता
था
हमको
वो
अनजान
बताया
करता
था
उसका
ही
गुलशन
देखो
है
उजड़
गया
जो
हमको
वीरान
बताया
करता
था
आख़िर
में
देखो
हासिल
है
कुछ
भी
नहीं
ये
सबको
शमसान
बताया
करता
था
उसकी
चालाकी
के
ही
अब
चर्चे
हैं
जो
खुदको
नादान
बताया
करता
था
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Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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एक
पल
में
जीता
एक
पल
में
मरता
था
मैं
ये
वो
दौर
था
जब
इश्क़
करता
था
मैं
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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कोई
है
बात
जिस
सेे
डर
रहा
हूँ
नहीं
मालूम
मैं
क्या
कर
रहा
हूँ
रहा
हूँ
मैं
किसी
का
हम–सफ़र
तो
किसी
की
राह
का
पत्थर
रहा
हूँ
किसी
के
वास्ते
वो
जी
रही
है
किसी
के
वास्ते
मैं
मर
रहा
हूँ
रहा
बे–चैन
मैं
बस
इस
वजह
से
कि
घर
होते
हुए
बे–घर
रहा
हूँ
किसी
को
भूल
जाने
के
लिए
मैं
किसी
के
साथ
हम–बिस्तर
रहा
हूँ
ग़ज़ल
पढ़कर
‘अभी’
वो
जान
लेगी
कहाँ
मैं
ज़िक्र
उसका
कर
रहा
हूँ
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Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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