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Avinash bharti
kisi ki raah to hain dekhte lekin
kisi ki raah to hain dekhte lekin | किसी की राह तो हैं देखते लेकिन
- Avinash bharti
किसी
की
राह
तो
हैं
देखते
लेकिन
किसी
का
हम
सेफ़र
होने
से
डरते
हैं
- Avinash bharti
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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बाद
तेरे
नहीं
कोई
हमें
मंज़िल
की
तलब
हमने
सोचा
है
कि
हम
राह
भटक
जाएँगे
Prince
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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मक़ाम
'फ़ैज़'
कोई
राह
में
जचा
ही
नहीं
जो
कू-ए-यार
से
निकले
तो
सू-ए-दार
चले
Faiz Ahmad Faiz
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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दौलत
शोहरत
बीवी
बच्चे
अच्छा
घर
और
अच्छे
दोस्त
कुछ
तो
है
जो
इन
के
बाद
भी
हासिल
करना
बाक़ी
है
कभी-कभी
तो
दिल
करता
है
चलती
रेल
से
कूद
पड़ूॅं
फिर
कहता
हूॅं
पागल
अब
तो
थोड़ा
रस्ता
बाक़ी
है
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Zia Mazkoor
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जो
तुम्हें
मंज़िल
पे
ले
जाएँगी
वो
राहें
अलग
हैं
मैं
वो
रस्ता
हूँ
कि
जिस
पर
तुम
भटक
कर
आ
गई
हो
Harman Dinesh
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हर
तरफ़
उग
आए
हैं
जंगल
हमारी
हार
के
जीत
का
कोई
भी
रस्ता
अब
नहीं
दिखता
हमें
Siddharth Saaz
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औरों
का
बताया
हुआ
रस्ता
नहीं
चुनते
जो
इश्क़
चुना
करते
हैं,
दुनिया
नहीं
चुनते
Bhaskar Shukla
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साथ
उनके
होने
का
दिल
करता
है
शाम
ढलते
रोने
का
दिल
करता
है
धरती
बंजर
दिल
की
अब
तो
है
मगर
ख़्वाब
इन
पर
बोने
का
दिल
करता
है
रात
जिस
में
हो
तेरी
मौजूदगी
इक
दफ़ा
बस
सोने
का
दिल
करता
है
ग़ैर
हूँ
पर
भार
तेरी
फ़िक़्र
का
अब
भी
मुझको
ढोने
का
दिल
करता
है
शहर
के
सब
रस्ते
मुझको
याद
हैं
फिर
भी
इन
में
खोने
का
दिल
करता
है
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Avinash bharti
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देती
रहती
है
हवा
पैग़ाम
क्या
सुब्ह
क्या
कहती
है
कहती
शाम
क्या
हँसता
हूँ
तो
आँखें
ग़ुस्सा
करती
हैं
आँसू
के
घर
है
हँसी
का
काम
क्या
कोई
चेहरा
आता
तो
है
ज़ेहन
में
याद
बस
आता
नहीं
है
नाम
क्या
इश्क़
की
जब
चाकरी
मंज़ूर
की
नींद
क्या
होती
है
और
आराम
क्या
दिल
हमारा
मुफ़्त
ले
जाए
कोई
टूटी
चीज़ों
के
लगाएँ
दाम
क्या
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Avinash bharti
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इश्क़
जैसा
कहानियों
में
है
कब
हक़ीक़त
कोई
बनाएगा
Avinash bharti
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हम
टूट
गए
यूँँ
तो
उम्मीद
रही
लेकिन
इस
रात
अँधेरी
को
इक
भोर
से
मिलना
है
Avinash bharti
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इश्क़
सारा
ज़िंदगी
पे
वार
कर
जीत
हमने
ली
है
बाज़ी
हारकर
है
ज़रूरत
तुझको
भी
तो
साथ
की
हर
किसी
को
यूँँ
न
तू
इंकार
कर
रस्ते
में
आती
रहेंगी
मुश्किलें
मंज़िलों
की
सोच
इनको
पार
कर
नफ़रतें
फ़ैली
हैं
चाहे
हर
तरफ़
मशवरा
मेरा
यही
है
प्यार
कर
धीरे
धीरे
सब
सही
हो
जाएगा
बस
भरोसा
ख़ुद
पे
तू
हर
बार
कर
जीते
जी
मिलना
नहीं
मुमकिन
है
तो
ख़ुद
को
इक
दिन
आउँगा
मैं
मारकर
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Avinash bharti
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