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Avinash bharti
ham toot ga.e yuñ to ummeed rahi lekin
ham toot ga.e yuñ to ummeed rahi lekin | हम टूट गए यूँँ तो उम्मीद रही लेकिन
- Avinash bharti
हम
टूट
गए
यूँँ
तो
उम्मीद
रही
लेकिन
इस
रात
अँधेरी
को
इक
भोर
से
मिलना
है
- Avinash bharti
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पा
ए
उम्मीद
प
रक्खे
हुए
सर
हैं
हम
लोग
हैं
न
होने
के
बराबर
ही
मगर
हैं
हम
लोग
तू
ने
बरता
ही
नहीं
ठीक
से
हम
को
ऐ
दोस्त
ऐब
लगते
हैं
ब-ज़ाहिर
प
हुनर
हैं
हम
लोग
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Abhishek shukla
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कुछ
रिश्तों
में
दिल
को
आज़ादी
नइँ
होती
कुछ
कमरों
में
रौशनदान
नहीं
होता
है
Vikram Gaur Vairagi
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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हर
कोई
सब्र
की
तलक़ीन
किया
करता
है
पर
कोई
ये
तो
बताए
कि
करूँँ
मैं,
कैसे?
Afzal Ali Afzal
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इस
उम्मीद
पे
रोज़
चराग़
जलाते
हैं
आने
वाले
बरसों
ब'अद
भी
आते
हैं
Zehra Nigaah
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दर्द
ऐसा
नजरअंदाज
नहीं
कर
सकते
जब्त
ऐसा
की
हम
आवाज
नहीं
कर
सकते
बात
तो
तब
थी
कि
तू
छोड़
के
जाता
ही
नहीं
अब
तेरे
मिलने
पे
हम
नाज
नहीं
कर
सकते
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Ismail Raaz
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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मैं
अब
किसी
की
भी
उम्मीद
तोड़
सकता
हूँ
मुझे
किसी
पे
भी
अब
कोई
ए'तिबार
नहीं
Jawwad Sheikh
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तू
मुझे
छोड़
के
ठुकरा
के
भी
जा
सकती
है
तेरे
हाथों
में
मेरे
हाथ
हैं
ज़ंजीर
नहीं
Sahir Ludhianvi
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बे
तेरे
क्या
वहशत
हम
को
तुझ
बिन
कैसा
सब्र-ओ-सुकूँ
तू
ही
अपना
शहर
है
जानी
तू
ही
अपना
सहरा
है
Ibn E Insha
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रूह
तक
में
उतार
कर
तुमको
कौन
जीता
है
मार
कर
तुमको
पाने
वाला
कभी
न
जानेगा
कैसा
लगता
है
हार
कर
तुमको
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Avinash bharti
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अभी
तो
वक़्त
है
हाथों
में
मय
का
जाम
आने
में
तुम्हारा
ज़िक्र
होने
में
तुम्हारा
नाम
आने
में
Avinash bharti
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बात
दिल
की
तू
दिल
में
रहने
दे
क्यूँँ
तमाशा
इसे
बनाता
है
Avinash bharti
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दिल
तुम्हें
आज
भी
बुलाता
है
और
फिर
थक
के
बैठ
जाता
है
मैं
नहीं
चाहता
की
याद
आऊँ
याद
जैसा
मुझे
वो
आता
है
कोई
वा'दा
किसी
से
हो
ही
क्यूँ
कौन
वादों
को
अब
निभाता
है
बात
होती
है
भूलने
की
मगर
कब
किसे
कोई
भूल
पाता
है
अपने
ख़्वाबों
को
बेचकर
कोई
चार
पैसे
कहीं
कमाता
है
बात
दिल
की
तू
दिल
में
रहने
दे
क्यूँँ
तमाशा
इसे
बनाता
है
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Avinash bharti
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देती
रहती
है
हवा
पैग़ाम
क्या
सुब्ह
क्या
कहती
है
कहती
शाम
क्या
हँसता
हूँ
तो
आँखें
ग़ुस्सा
करती
हैं
आँसू
के
घर
है
हँसी
का
काम
क्या
कोई
चेहरा
आता
तो
है
ज़ेहन
में
याद
बस
आता
नहीं
है
नाम
क्या
इश्क़
की
जब
चाकरी
मंज़ूर
की
नींद
क्या
होती
है
और
आराम
क्या
दिल
हमारा
मुफ़्त
ले
जाए
कोई
टूटी
चीज़ों
के
लगाएँ
दाम
क्या
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Avinash bharti
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