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Avinash bharti
rooh tak men utaar kar tumko
rooh tak men utaar kar tumko | रूह तक में उतार कर तुमको
- Avinash bharti
रूह
तक
में
उतार
कर
तुमको
कौन
जीता
है
मार
कर
तुमको
पाने
वाला
कभी
न
जानेगा
कैसा
लगता
है
हार
कर
तुमको
- Avinash bharti
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मैं
सच
कहूँगी
मगर
फिर
भी
हार
जाऊँगी
वो
झूट
बोलेगा
और
ला-जवाब
कर
देगा
Parveen Shakir
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दोनों
जहान
तेरी
मोहब्बत
में
हार
के
वो
जा
रहा
है
कोई
शब-ए-ग़म
गुज़ार
के
Faiz Ahmad Faiz
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तू
मोहब्बत
से
कोई
चाल
तो
चल
हार
जाने
का
हौसला
है
मुझे
Ahmad Faraz
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वाक़िफ़
कहाँ
ज़माना
हमारी
उड़ान
से
वो
और
थे
जो
हार
गए
आसमान
से
Faheem Jogapuri
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अपना
सब
कुछ
हार
के
लौट
आए
हो
न
मेरे
पास
मैं
तुम्हें
कहता
भी
रहता
था
कि
दुनिया
तेज़
है
Tehzeeb Hafi
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तेरा
मोहब्बत
से
हार
जाना
मेरी
मोहब्बत
की
हार
भी
है
Siddharth Saaz
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खेल
ज़िंदगी
के
तुम
खेलते
रहो
यारो
हार
जीत
कोई
भी
आख़िरी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
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हर
दिन
ही
मोहब्बत
को
पाने
की
लड़ाई
में
जो
हार
नहीं
सकता
वो
जीत
नहीं
सकता
Hasan Raqim
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अब
इसको
अपनी
हार
कहूँ
या
कहूँ
मैं
जीत
रूठा
हुआ
था
मैं,
वो
मना
ले
गया
मुझे
Krishna Bihari Noor
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हार
हो
जाती
है
जब
मान
लिया
जाता
है
जीत
तब
होती
है
जब
ठान
लिया
जाता
है
Shakeel Azmi
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हम
टूट
गए
यूँँ
तो
उम्मीद
रही
लेकिन
इस
रात
अँधेरी
को
इक
भोर
से
मिलना
है
Avinash bharti
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किसे
मालूम
कितने
ग़म
छिपाता
है
वो
चेहरा
जो
हमेशा
मुस्कुराता
है
मैं
भी
कुछ
सोचकर
रखता
हूँ
नज़दीकी
वो
भी
कुछ
सोचकर
के
दूर
जाता
है
ख़ुशी
की
बात
सुनकर
के
हुआ
है
दुख
बिछड़
कर
भी
वो
सब
वादे
निभाता
है
पसीना
ख़ूँ
लगाकर
भी
पराया
ही
कोई
मज़दूर
कितने
घर
बनाता
है
लगाता
आग
ख़ुद
है
वो
सियासत
में
सियासत
में
ही
फिर
उसको
बुझाता
है
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Avinash bharti
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इश्क़
सारा
ज़िंदगी
पे
वार
कर
जीत
हमने
ली
है
बाज़ी
हारकर
है
ज़रूरत
तुझको
भी
तो
साथ
की
हर
किसी
को
यूँँ
न
तू
इंकार
कर
रस्ते
में
आती
रहेंगी
मुश्किलें
मंज़िलों
की
सोच
इनको
पार
कर
नफ़रतें
फ़ैली
हैं
चाहे
हर
तरफ़
मशवरा
मेरा
यही
है
प्यार
कर
धीरे
धीरे
सब
सही
हो
जाएगा
बस
भरोसा
ख़ुद
पे
तू
हर
बार
कर
जीते
जी
मिलना
नहीं
मुमकिन
है
तो
ख़ुद
को
इक
दिन
आउँगा
मैं
मारकर
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Avinash bharti
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दिल
तुम्हें
आज
भी
बुलाता
है
और
फिर
थक
के
बैठ
जाता
है
मैं
नहीं
चाहता
की
याद
आऊँ
याद
जैसा
मुझे
वो
आता
है
कोई
वा'दा
किसी
से
हो
ही
क्यूँ
कौन
वादों
को
अब
निभाता
है
बात
होती
है
भूलने
की
मगर
कब
किसे
कोई
भूल
पाता
है
अपने
ख़्वाबों
को
बेचकर
कोई
चार
पैसे
कहीं
कमाता
है
बात
दिल
की
तू
दिल
में
रहने
दे
क्यूँँ
तमाशा
इसे
बनाता
है
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Avinash bharti
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मुहब्बत
में
ग़मो
से
पार
जाने
का
किया
है
फ़ैसला
अब
हार
जाने
का
भरा
लगता
था
आने
से
तेरे
जो
घर
है
अब
मातम-कदा
त्यौहार
जाने
का
कहानी
चल
रही
है
और
ख़ुश
हैं
सब
किसे
दुख
छूट
इक
क़िरदार
जाने
का
सफ़र
में
मुश्किलें
तो
हैं
मगर
मैंने
इरादा
कर
लिया
इस
बार
जाने
का
वो
मज़हब
की
लड़ाई
ख़त्म
तो
कर
दे
मगर
डर
है
उसे
सरकार
जाने
का
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Avinash bharti
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