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Arohi Tripathi
khelti hai roz hamse zindagi
khelti hai roz hamse zindagi | खेलती है रोज़ हम सेे ज़िन्दगी
- Arohi Tripathi
खेलती
है
रोज़
हम
सेे
ज़िन्दगी
हो
गई
है
यार
फिर
से
आशिक़ी
आज
जानी
ने
हमें
अपना
कहा
हो
गई
पूरी
हमारी
शा'इरी
और
कितना
ज़ख़्म
दोगे
बोल
दो
और
कितना
भूल
जाऊँ
हर
ख़ुशी
- Arohi Tripathi
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ये
गूँगों
की
महफ़िल
है
निकलना
ही
पड़ेगा
क्या
इतनी
ख़ता
कम
है
कि
हम
बोल
पड़े
हैं
Waseem Barelvi
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मोहब्बत
करने
वाले
कम
न
होंगे
तिरी
महफ़िल
में
लेकिन
हम
न
होंगे
Hafeez Hoshiarpuri
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पहले-पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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देख
ज़िंदाँ
से
परे
रंग-ए-चमन
जोश-ए-बहार
रक़्स
करना
है
तो
फिर
पाँव
की
ज़ंजीर
न
देख
Majrooh Sultanpuri
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मज़ा
चहिए
जो
आख़िर
तक
उदासी
से
मोहब्बत
कर
ख़ुशी
का
क्या
है
कब
तब्दील
है
से
थी
में
हो
जाए
Atul K Rai
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हो
न
हो
एक
ही
तस्वीर
के
दो
पहलू
हैं
रक़्स
करता
हुआ
तू
आग
में
जलता
हुआ
मैं
Shahid Zaki
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ये
ज़िंदगी
भी
अजब
कारोबार
है
कि
मुझे
ख़ुशी
है
पाने
की
कोई
न
रंज
खोने
का
Javed Akhtar
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गुमान
है
या
किसी
विश्वास
में
है
सभी
अच्छे
दिनों
की
आस
में
है
ये
कैसा
जश्न
है
घर
वापसी
का
अभी
तो
राम
ही
वनवास
में
है
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Azhar Iqbal
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हर
ख़ुशी
मुस्कुरा
के
कहती
है
दर्द
बनकर
छुपे
हुए
हो
तुम
आज
आब-ओ-हवा
में
ख़ुश्बू
है
लग
रहा
है
घुले
हुए
हो
तुम
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Ritesh Rajwada
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सब
का
ख़ुशी
से
फ़ासला
एक
क़दम
है
हर
घर
में
बस
एक
ही
कमरा
कम
है
Javed Akhtar
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पास
रहने
को
घर
नहीं
होगा
इस
सेे
ज़्यादा
सफ़र
नहीं
होगा
आख़िरी
बार
चूम
लो
माथा
फिर
इधर
से
गुज़र
नहीं
होगा
क़त्ल
कर
दो
मिरी
मोहब्बत
का
मेरा
छलनी
जिगर
नहीं
होगा
आ
मिरे
लब
को
चूम
ले
दिलबर
ज़हर
का
कुछ
असर
नहीं
होगा
जिस
जगह
तुमने
पाँव
रक्खे
हैं
उस
जगह
गुलमोहर
नहीं
होगा
भूलने
में
लगा
तो
इक
हफ़्ता
इस
सेे
ज़्यादा
मगर
नहीं
होगा
इक
कहानी
सुनो
मोहब्बत
की
हिज्र
का
जिस
में
डर
नहीं
होगा
याद
करके
तुझे
ही
ज़िंदा
हैं
क्या
लगा
चारा-गर
नहीं
होगा
वो
ज़माना
था
दूसरा
साहब
अब
सफ़र
ये
उधर
नहीं
होगा
ज़िक्र
करते
नहीं
थके
हम
तो
क्या
हुआ
जो
अगर
नहीं
होगा
मैं
नहीं
तुम
ही
छोड़
दो
मुझको
लौट
आना
अगर
नहीं
होगा
गाँव
कस्बा
तुझे
तलाशा
है
जो
बचा
हो
नगर
नहीं
होगा
तेरे
जाने
के
बाद
याद
रहे
अब
यहाँ
पर
शजर
नहीं
होगा
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Arohi Tripathi
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दाग़
दामन
पर
तुम्हारे
जब
लगे
ये
न
तुम
भी
देख
पाए
कब
लगे
ठीक
उसने
तब
निशाना
तय
किया
तीर
सीने
में
तुम्हारे
जब
लगे
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Arohi Tripathi
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ढूँढने
पर
हमें
न
पाओगे
अब
बताओ
किधर
से
आओगे
कौन
हो
तुम
कहाँ
से
आए
हो
यार
अपना
पता
बताओगे
इश्क़
हम
सेे
हुआ
है
बोलो
फिर
और
कितना
भला
छुपाओगे
एक
दिन
भी
मुहाल
है
जीना
और
कितना
हमें
सताओगे
कौन
सा
इश्क़
यार
कैसा
इश्क़
ऐसी
कोई
ग़ज़ल
सुनाओगे
नाम
ले
लूँ
अगर
तुम्हारा
मैं
अपनी
दुल्हन
हमें
बनाओगे
मौत
आती
नहीं
मुझे
जानी
ज़िंदगी
भर
हमें
रुलाओगे
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Arohi Tripathi
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सवेरा
ख़त्म
है
तो
शाम
आए
कहे
कोई
भला
नाकाम
आए
सभी
ने
साथ
छोड़ा
है
हमारा
वो
मेरे
हर
दुखों
में
काम
आए
दु'आ
करती
रहूँगी
ये
हमेशा
जहाँ
में
बस
उन्हीं
का
नाम
आए
हमारा
दिल
ख़ुशी
से
झूम
उट्ठा
अवध
में
आज
फिर
श्री
राम
आए
पुजारिन
मैं
भी
दर्शन
चाहती
हूँ
बड़ी
देरी
हुई
अब
धाम
आए
मोहब्बत
में
हुई
पागल
क़सम
से
भले
हम
पर
कोई
इल्ज़ाम
आए
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Arohi Tripathi
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ग़रीब
लोग
मोहब्बत
न
कर
सकें
तो
क्या
अलग
है
बात
ज़ियारत
न
कर
सकें
तो
क्या
Arohi Tripathi
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