paas rahne ko ghar nahin hogaa | पास रहने को घर नहीं होगा

  - Arohi Tripathi
पासरहनेकोघरनहींहोगा
इससेेज़्यादासफ़रनहींहोगा
आख़िरीबारचूमलोमाथा
फिरइधरसेगुज़रनहींहोगा
क़त्लकरदोमिरीमोहब्बतका
मेराछलनीजिगरनहींहोगा
मिरेलबकोचूमलेदिलबर
ज़हरकाकुछअसरनहींहोगा
जिसजगहतुमनेपाँवरक्खेहैं
उसजगहगुलमोहरनहींहोगा
भूलनेमेंलगातोइकहफ़्ता
इससेेज़्यादामगरनहींहोगा
इककहानीसुनोमोहब्बतकी
हिज्रकाजिस
मेंडरनहींहोगा
यादकरकेतुझेहीज़िंदाहैं
क्यालगाचारा-गरनहींहोगा
वोज़मानाथादूसरासाहब
अबसफ़रयेउधरनहींहोगा
ज़िक्रकरतेनहींथकेहमतो
क्याहुआजोअगरनहींहोगा
मैंनहींतुमहीछोड़दोमुझको
लौटआनाअगरनहींहोगा
गाँवकस्बातुझेतलाशाहै
जोबचाहोनगरनहींहोगा
तेरेजानेकेबादयादरहे
अबयहाँपरशजरनहींहोगा
  - Arohi Tripathi
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