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Arohi Tripathi
daagh daaman par tumhaare jab lage
daagh daaman par tumhaare jab lage | दाग़ दामन पर तुम्हारे जब लगे
- Arohi Tripathi
दाग़
दामन
पर
तुम्हारे
जब
लगे
ये
न
तुम
भी
देख
पाए
कब
लगे
ठीक
उसने
तब
निशाना
तय
किया
तीर
सीने
में
तुम्हारे
जब
लगे
- Arohi Tripathi
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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सच
कहें
तो
वो
कहानी
बीच
में
दम
तोड़
देगी
जिस
कहानी
को
सभी
किरदार
छोड़े
जा
रहे
हैं
Anurag Pandey
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मैं
आज
जो
भी
कहूँगा
तुम
सेे
वो
सच
है
जानम
ये
जान
लो
तुम
मिरी
ग़ज़ल
के
हरेक
मिसरे
से
मेरी
चाहत
झलक
रही
है
Amaan Pathan
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हमको
हकीम
ने
ही
किया
ठीक
दोस्तों
हम
पर
किसी
के
लम्स
ने
जादू
नहीं
किया
Tanoj Dadhich
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तुम
मिरी
ज़िंदगी
हो
ये
सच
है
ज़िंदगी
का
मगर
भरोसा
क्या
Bashir Badr
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ये
सच
है
कि
पाँवों
ने
बहुत
कष्ट
उठाए
पर
पाँव
किसी
तरह
राहों
पे
तो
आए
Dushyant Kumar
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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हमको
लगता
था
आप
आऍंगे
या
हमें
ही
वहाँ
बुलाऍंगे
एक
खिड़की
का
फ़्रेम
ख़ाली
है
घर
को
क्या
ख़ाक
हम
सजाऍंगे
ईद
के
दिन
भी
तुम
नहीं
आए
ईद
क्या
ख़ैर
से
मनाऍंगे
वादे
पे
तू
खरा
नहीं
उतरा
वा'दा
हम
तो
मगर
निभाएँगे
तू
हमें
छोड़
कर
चला
जाए
छोड़कर
दुनिया
हम
भी
जाऍंगे
कहती
हो
मर
गए
तो
मर
जाओ
देखना
मर
के
हम
दिखाऍंगे
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Arohi Tripathi
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तीसरी
दफ़ा
हम
सब
कुछ
समझ
गए
जानी
तीसरी
दफा
भी
तुमने
कहा
नहीं
कुछ
भी
Arohi Tripathi
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मोहब्बत
से
हुए
बीमार
जानी
नहीं
अच्छा
नहीं
है
प्यार
जानी
पकड़
में
आ
गए
इस
बार
जानी
समझते
हो
कि
हो
हुश्यार
जानी
बदलते
थे
हमेशा
तुम
बदन
को
बहुत
गंदे
बड़े
बदकार
जानी
तुम्हें
समझा
रहे
फिर
भी
न
माने
रहे
हो
तुम
बड़े
मक्कार
जानी
सजाया
घर
तुम्हारे
इश्क़
में
ही
मनाया
भी
नहीं
त्यौहार
जानी
तुम्हारे
साथ
फोटो
है
हमारी
मगर
उस
में
दिखे
बेकार
जानी
कभी
लिखते
नहीं
अच्छी
ग़ज़ल
हम
तिरे
जैसे
नहीं
शहकार
जानी
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Arohi Tripathi
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ख़ुद-कुशी
करने
लगी
हूँ
शा'इरी
करने
लगी
हूँ
कर
दिया
बर्बाद
ख़ुद
को
ज़िंदगी
करने
लगी
हूँ
बुतपरस्ती
काम
मेरा
काफ़िरी
करने
लगी
हूँ
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Arohi Tripathi
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धूप
से
छाँव
की
तरफ़
चलना
शहरस
गाँव
की
तरफ़
चलना
Arohi Tripathi
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