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Armaan khan
har insaan ke andar itni khwaahish ho
har insaan ke andar itni khwaahish ho | हर इंसान के अंदर इतनी ख़्वाहिश हो
- Armaan khan
हर
इंसान
के
अंदर
इतनी
ख़्वाहिश
हो
धूप
ज़ियादा
हो
जाए
तो
बारिश
हो
किसी
बहाने
याद
रखे
वो
शख़्स
मुझे
इश्क़
अगर
नामुमकिन
है
तो
रंजिश
हो
- Armaan khan
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किसी
की
तपिश
में
ख़ुशी
है
किसी
की
किसी
की
ख़लिश
में
मज़ा
है
किसी
का
Unknown
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मैं
बहुत
ख़ुश
था
कड़ी
धूप
के
सन्नाटे
में
क्यूँँ
तेरी
याद
का
बादल
मेरे
सर
पर
आया
Ahmad Mushtaq
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ऐसी
सर्दी
है
कि
सूरज
भी
दुहाई
माँगे
जो
हो
परदेस
में
वो
किस
सेे
रज़ाई
माँगे
Rahat Indori
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सफ़र
में
धूप
तो
होगी
जो
चल
सको
तो
चलो
सभी
हैं
भीड़
में
तुम
भी
निकल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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मैं
पहले
हारी
थी
इस
बार
हारने
की
नहीं
तू
जा
रहा
है
तो
जा
मैं
पुकारने
की
नहीं
मुझे
पहाड़ों
पे
मौसम
का
लुत्फ़
लेना
है
मैं
तेरे
कमरे
में
सर्दी
गुज़ारने
की
नहीं
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Mumtaz Naseem
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तुम
तो
सर्दी
की
हसीं
धूप
का
चेहरा
हो
जिसे
देखते
रहते
हैं
दीवार
से
जाते
हुए
हम
Nomaan Shauque
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शदीद
गर्मी
में
कैसे
निकले
वो
फूल-चेहरा
सो
अपने
रस्ते
में
धूप
दीवार
हो
रही
है
Shakeel Jamali
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गर्मी
लगी
तो
ख़ुद
से
अलग
हो
के
सो
गए
सर्दी
लगी
तो
ख़ुद
को
दोबारा
पहन
लिया
Bedil Haidri
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सर्दी
और
गर्मी
के
उज़्र
नहीं
चलते
मौसम
देख
के
साहब
इश्क़
नहीं
होता
Moin Shadab
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सबको
हासिल
होने
में
कुछ
मजबूरी
क़ाएम
रख
सब
सेे
रिश्ते
रख
लेकिन
सब
सेे
दूरी
क़ाएम
रख
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Armaan khan
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गाँव
में
छोड़
के
आया
था
मोहब्बत
अपनी
शहर
में
जिस्म
था
और
गाँव
में
अटका
दिल
था
उसकी
शादी
बड़े
लोगों
में
लगी
और
मैं
गरीब
शहरस
भाग
के
जाता
भी
तो
क्या
हासिल
था
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Armaan khan
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थोड़ी
मिट्टी
गूँथ
और
इक
दिल
बना
कुछ
न
कर
रस्ते
को
ही
मंज़िल
बना
उसकी
हालत
पर
मैं
रोया
देर
तक
वो
मुझे
कहता
था
मुस्तक़बिल
बना
चाय
पर
चर्चा
चली
थी
इश्क़
पर
और
फिर
दोनों
का
अपना
बिल
बना
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Armaan khan
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हुई
है
यार
ख़ुदा
तुझ
सेे
जबसे
बात
मेरी
कई
दिनों
से
बड़ी
मुतमइन
है
ज़ात
मेरी
Armaan khan
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तुम्हारा
ज़िक्र
चला
है
हमारे
घर
में
फिर
हम
एक
कोने
में
बैठे
हैं
मुस्कुरा
रहे
हैं
Armaan khan
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