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Armaan khan
ab is
ab is | अब इस
- Armaan khan
अब
इस
में
मिलने
न
मिलने
का
कोई
रंग
नहीं
ये
पाक
साफ़
मोहब्बत
है
कोई
जंग
नहीं
ख़ुशी
अहम
थी
सो
हँसता
हूँ
चीख़
चीख़
के
मैं
तो
क्या
हुआ
कि
अकेला
हूँ
उसके
संग
नहीं
सुना
था
पहले
ही
अंजाम
ए
इश्क़
लोगों
से
सो
अपने
हाल
पे
मायूस
तो
हूँ
दंग
नहीं
ये
किसपे
ख़र्च
किया
अपनी
ज़िंदगी
अरमान
वो
जिसको
बात
भी
करने
का
ढंग
वंग
नहीं
- Armaan khan
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खटखटाने
की
कोई
ज़हमत
ही
आख़िर
क्यूँ
करे
इसलिए
भी
घर
का
दरवाज़ा
खुला
रखता
हूँ
मैं
Tousief Tabish
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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मिरे
सलीक़े
से
मेरी
निभी
मोहब्बत
में
तमाम
उम्र
मैं
नाकामियों
से
काम
लिया
Meer Taqi Meer
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वो
एक
दिन
जो
तुझे
सोचने
में
गुज़रा
था
तमाम
उम्र
उसी
दिन
की
तर्जुमानी
है
Abhishek shukla
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ये
इश्क़-विश्क़
का
क़िस्सा
तमाम
हो
जाए
सफ़ेद
दाढ़ी
हवस
की
गुलाम
हो
जाए
जवान
लड़कियों
बूढ़ों
से
तुम
रहो
हुश्यार
न
जाने
कौन
कहाँ
आसाराम
हो
जाए
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Paplu Lucknawi
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अंजाम
उसके
हाथ
है
आग़ाज़
करके
देख
भीगे
हुए
परों
से
ही
परवाज़
करके
देख
Nawaz Deobandi
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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यही
अंजाम
अक्सर
हम
ने
देखा
है
मोहब्बत
का
कहीं
राधा
तरसती
है
कहीं
कान्हा
तरसता
है
Virendra Khare Akela
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चलता
रहने
दो
मियाँ
सिलसिला
दिलदारी
का
आशिक़ी
दीन
नहीं
है
कि
मुकम्मल
हो
जाए
Abbas Tabish
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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उसने
ज़बाँ
से
कह
तो
दिया
अलविदा
मगर
बस
एक
बार
आँख
भी
कह
दे
तो
और
बात
Armaan khan
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मौत
का
इंतिज़ार
किसको
है?
नींद
का
है,
मगर
नहीं
आती
Armaan khan
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इश्क़
का
अपना
भी
में'आर
हुआ
करता
है
और
अब
उस
सेे
मैं
नीचे
तो
नहीं
आऊँगा
तुझे
कुछ
कहना
है
मुझ
सेे
तो
यहीं
पर
कह
दे
मैं
वो
'आशिक़
हूँ
जो
पीछे
तो
नहीं
आऊँगा।
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Armaan khan
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जैसे
सितारा
कोई
चले
रात
की
तरफ़
मैं
भागता
था
उसके
ख़यालात
की
तरफ़
किसका
सहारा
मेरी
मोहब्बत
से
ख़ास
था
किसने
बढ़ाया
हाथ
तेरे
हाथ
की
तरफ़
क्या
चाहती
हो
चीख़
के
रोने
लगे
कोई
सब
खींच
लेंगे
तुमको
सवालात
की
तरफ़
क्या
इश्क़
में
तुम्हें
भी
ज़माने
की
फ़िक्र
है
क्या
जा
रहे
हो
तुम
भी
रिवायात
की
तरफ़?
उसका
करम
न
आया
अभी
तक
मेरी
तरफ़
मैं
आ
गया
ज़रूर
इबादात
की
तरफ़
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Armaan khan
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आपसे
राबता
था
पहले
कोई
ओह,
हाँ,
याद
आया,
कैसे
हो
Armaan khan
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