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Armaan khan
usne zabaan se kah to diya alvida magar
usne zabaan se kah to diya alvida magar | उसने ज़बाँ से कह तो दिया अलविदा मगर
- Armaan khan
उसने
ज़बाँ
से
कह
तो
दिया
अलविदा
मगर
बस
एक
बार
आँख
भी
कह
दे
तो
और
बात
- Armaan khan
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आज
तो
दिल
के
दर्द
पर
हँस
कर
दर्द
का
दिल
दुखा
दिया
मैं
ने
Zubair Ali Tabish
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ऐसी
तारीकियाँ
आँखों
में
बसी
हैं
कि
'फ़राज़'
रात
तो
रात
है
हम
दिन
को
जलाते
हैं
चराग़
Ahmad Faraz
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दिल
का
गुलाब
मैं
ने
जिसे
चूम
कर
दिया
उस
ने
मुझे
बहार
से
महरूम
कर
दिया
Anjum Barabankvi
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कहाँ
तो
तय
था
चराग़ाँ
हर
एक
घर
के
लिए
कहाँ
चराग़
मुयस्सर
नहीं
शहर
के
लिए
Dushyant Kumar
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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कुछ
नज़र
आता
नहीं
उस
के
तसव्वुर
के
सिवा
हसरत-ए-दीदार
ने
आँखों
को
अंधा
कर
दिया
Haidar Ali Aatish
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दु'आ
करो
कि
सलामत
रहे
मिरी
हिम्मत
ये
इक
चराग़
कई
आँधियों
पे
भारी
है
Waseem Barelvi
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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खो
दिया
तुम
को
तो
हम
पूछते
फिरते
हैं
यही
जिस
की
तक़दीर
बिगड़
जाए
वो
करता
क्या
है
Firaq Gorakhpuri
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भारत
के
उपकार
को,
मान
रहे
सब
लोग
रोग
'घटाने'
के
लिए,
दिया
विश्व
को
'योग'
Divy Kamaldhwaj
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गाँव
में
छोड़
के
आया
था
मोहब्बत
अपनी
शहर
में
जिस्म
था
और
गाँव
में
अटका
दिल
था
उसकी
शादी
बड़े
लोगों
में
लगी
और
मैं
गरीब
शहरस
भाग
के
जाता
भी
तो
क्या
हासिल
था
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Armaan khan
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चलते
रहना
थकान
जाएगी
और
क्या
होगा
जान
जाएगी
मैं
यही
सोचकर
अकेला
हूँ
वो
किसी
रोज़
मान
जाएगी
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Armaan khan
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बाहर
अक्सर
शोर-शराबा
रहता
है
अंदर
इक
ख़ामोशी
पलती
रहती
है
हम
से
इक
अंदाज़
नहीं
बदला
जाता
दुनिया
कैसे
रंग
बदलती
रहती
है
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Armaan khan
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सोचा
नहीं
कि
क्यूँ
मुझे
नाकामियाँ
मिलीं
जब
अपने
ही
वजूद
में
सौ
ख़ामियाँ
मिलीं
तन्हाइयों
से
तंग
था
मैं
पिछले
कुछ
दिनों
फिर
एक
दिन
मुझे
मेरी
परछाइयाँ
मिलीं
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Armaan khan
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ऐ
दिल-ए-हक़
शनास
दुनिया
है
न
लगा
इस
सेे
आस,
दुनिया
है
रूह
को
है
तेरी
ख़ुदा
की
तलब
और
तेरे
आस
पास
दुनिया
है
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Armaan khan
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