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Mohd Arham
kiya hai ज़ाया' tumne eed ka din bhi
kiya hai ज़ाया' tumne eed ka din bhi | किया है ज़ाया' तुमने ईद का दिन भी
- Mohd Arham
किया
है
ज़ाया'
तुमने
ईद
का
दिन
भी
गले
लगने
के
वरना
सौ
बहाने
थे
- Mohd Arham
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आओ
गले
मिल
कर
ये
देखें
अब
हम
में
कितनी
दूरी
है
Shariq Kaifi
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कहीं
किसी
भी
बहाने
मुझे
बुला
इक
रोज़
ऐ
चाँद
तुझ
को
क़सम
है
ज़मीं
पे
आ
इक
रोज़
मुझे
क़बूल
है
गर
खाक़
भी
हो
जाऊँ
मैं
क़रीब
आ
के
मुझे
सीने
से
लगा
इक
रोज़
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Chandan Sharma
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कोई
हाथ
भी
न
मिलाएगा
जो
गले
मिलोगे
तपाक
से
ये
नए
मिज़ाज
का
शहर
है
ज़रा
फ़ासले
से
मिला
करो
Bashir Badr
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इक
अरसे
बाद
वो
मिला
इस
बार
होली
में
उसने
गले
लगा
के
दिया
प्यार
होली
में
Harsh saxena
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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पेड़
को
काटने
वाले
क्या
जाने
दुख
हम
गले
लग
नहीं
सकते
दीवार
से
Neeraj Neer
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आज
के
दिन
कभी
सीने
से
लगाते
थे
तुम्हें
और
अब
तुमको
बधाई
भी
नहीं
दे
सकते
Astitwa Ankur
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ये
कब
कहा
था
मुझे
हमनवा
नहीं
देना
मगर
हाँ
फिर
से
वही
बे-वफ़ा
नहीं
देना
मैं
टूट
जाऊँ
तो
आकर
गले
लगा
लेना
कोई
दलील
कोई
मशवरा
नहीं
देना
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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इसी
ख़्वाब
में
ज़ाया'
किया
'ईद
को
हर
दम
कभी
बोले
वो
सीने
से
लगकर
मुबारक
हो
Harsh saxena
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ये
मेरा
ग़म
भी
तो
कुछ
कम
नहीं
है
कि
हम
दोनों
बिछड़
के
हम
नहीं
है
मैं
वो
था
जो
बिछड़
के
मर
गया
था
तू
वो
है
जिसको
कोई
ग़म
नहीं
है
करूँँ
मैं
क्या
गिला
उस
बे-वफ़ा
से
बिछड़
के
आँख
जिसकी
नम
नहीं
है
पुकारो
मत
मुझे
उस
नाम
से
अब
जो
बिछड़े
यार
वो
हमदम
नहीं
है
मेरा
दिल
भी
कहीं
अब
लग
चुका
है
तेरे
दिल
में
भी
अब
'अरहम'
नहीं
है
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Mohd Arham
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भुला
के
फ़िक्र
हम
महशर
की
'अरहम'
यहाँ
बस
दुनिया
दुनिया
कर
रहे
हैं
Mohd Arham
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उधर
छपने
लगे
थे
कार्ड
शादी
के
इधर
लड़के
ने
सुन
के
ख़ुद-कुशी
कर
ली
Mohd Arham
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तेरी
गलियों
से
जब
गुज़रते
हैं
लोग
हँसते
हैं
ताने
कसते
हैं
Mohd Arham
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ऐसा
लगता
है
देखी
दाखी
है
ज़िंदगी
कोई
फ़िल्म
जैसी
है
पाँव
फैला
के
देखा
तो
जाना
दुनिया
कमरे
से
ज़्यादा
छोटी
है
हिज्र
के
दिन
हैं
और
घड़ी
उस
पर
जाने
क्यूँ
उल्टे
पाँव
चलती
है
हाफ़िज़ा
कौन
कर
रहा
है
मेरा
किसके
रटने
से
हिचकी
आई
है
एक
रस्ता
है
आप
तक
जाता
और
उस
में
भी
अफ़रा
तफ़री
है
मैं
मुदावा
करूँगा
क्यूँँ
ग़म
का
मुझको
प्यारी
मेरी
उदासी
है
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Mohd Arham
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