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Mohd Arham
teri galiyon se jab guzarte hain
teri galiyon se jab guzarte hain | तेरी गलियों से जब गुज़रते हैं
- Mohd Arham
तेरी
गलियों
से
जब
गुज़रते
हैं
लोग
हँसते
हैं
ताने
कसते
हैं
- Mohd Arham
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क़ब्रों
में
नहीं
हम
को
किताबों
में
उतारो
हम
लोग
मोहब्बत
की
कहानी
में
मरे
हैं
Ajaz tawakkal
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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इश्क़
जब
तक
न
कर
चुके
रुस्वा
आदमी
काम
का
नहीं
होता
Jigar Moradabadi
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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यार
तस्वीर
में
तन्हा
हूँ
मगर
लोग
मिले
कई
तस्वीर
से
पहले
कई
तस्वीर
के
बा'द
Umair Najmi
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क्या
लोग
हैं
कि
दिल
की
गिरह
खोलते
नहीं
आँखों
से
देखते
हैं
मगर
बोलते
नहीं
Akhtar Hoshiyarpuri
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सब
की
हिम्मत
नहीं
ज़माने
में
लोग
डरते
हैं
मुस्कुराने
में
एक
लम्हा
भी
ख़र्च
होता
नहीं
मेरी
ख़ुशियों
को
आने
जाने
में
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Vishal Singh Tabish
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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तेरी
दुनिया
में
सब
नाशाद
आए
अकेले
हम
नहीं
बर्बाद
आए
दु'आ
में
इक
परिंदे
ने
ये
माँगा
ख़ुदाया
अब
नया
सय्याद
आए
बना
तस्वीर
इक
ऐसी
मुसव्विर
जिसे
देखूँ
तो
ख़ुद
की
याद
आए
जब
अपनी
ज़िंदगी
फ़ाक़े
में
गुज़री
मुसलसल
याद
तब
अज्दाद
आए
हमारे
शहर
का
दस्तूर
है
ये
यहाँ
जो
आए
वो
बर्बाद
आए
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Mohd Arham
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तुम्हारे
नाम
से
रौशन
हुआ
हूँ
वगरना
कौन
मुझको
पूछता
था
Mohd Arham
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इक
तुझे
देखने
के
ख़ातिर
ही
बे-वजह
छत
पे
हम
टहलते
हैं
Mohd Arham
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मुयस्सर
थी
कभी
ये
रात
हम
को
भी
कभी
सोते
थे
हम
भी
चैन
से
अरहम
Mohd Arham
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जिसे
आते
नहीं
थे
उर्दू
के
मानी
बिछड़
के
तुझ
सेे
वो
अब
ग़ज़लें
कहता
है
Mohd Arham
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