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Mohd Arham
muyassar thii kabhi ye raat ham ko bhi
muyassar thii kabhi ye raat ham ko bhi | मुयस्सर थी कभी ये रात हम को भी
- Mohd Arham
मुयस्सर
थी
कभी
ये
रात
हम
को
भी
कभी
सोते
थे
हम
भी
चैन
से
अरहम
- Mohd Arham
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इतना
तो
ज़िन्दगी
में
किसी
के
ख़लल
पड़े
हँसने
से
हो
सुकून
न
रोने
से
कल
पड़े
जिस
तरह
हँस
रहा
हूँ
मैं
पी
पी
के
गर्म
अश्क
यूँँ
दूसरा
हँसे
तो
कलेजा
निकल
पड़े
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Kaifi Azmi
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थकना
भी
लाज़मी
था
कुछ
काम
करते
करते
कुछ
और
थक
गया
हूँ
आराम
करते
करते
Zafar Iqbal
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सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
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उसूली
तौर
पे
मर
जाना
चाहिए
था
मगर
मुझे
सुकून
मिला
है
तुझे
जुदा
कर
के
Ali Zaryoun
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उँगलियों
चैन
पड़
गया
तुमको
उसने
इग्नोर
कर
दिया
मैसेज
Nadim Nadeem
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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दिल
को
सुकून
रूह
को
आराम
आ
गया
मौत
आ
गई
कि
दोस्त
का
पैग़ाम
आ
गया
Jigar Moradabadi
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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तुम
न
आए
तो
क्या
सहर
न
हुई
हाँ
मगर
चैन
से
बसर
न
हुई
मेरा
नाला
सुना
ज़माने
ने
एक
तुम
हो
जिसे
ख़बर
न
हुई
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Mirza Ghalib
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भरोसा
मुझको
ऐसे
शख़्स
पे
था
की
जिसने
पेड़
काटा
साया
करके
Mohd Arham
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ज़िन्दगी
थी
मेरी
भी
आँखों
में
जब
तलक
इक
परी
थी
आँखों
में
इसलिए
भी
ख़ुदा
के
पास
रहा
इक
नमाज़न
बसी
थी
आँखों
में
जिसकी
आँखों
में
लाख
चेहरे
हैं
उसका
चेहरा
है
मेरी
आँखों
में
दर्द
सारे
उभरते
जाते
हैं
जाने
सीलन
है
कैसी
आँखों
में
उसके
तोहफ़े
नहीं
किए
ज़ाया'
अश्क
अब
भी
हैं
मेरी
आँखों
में
हाए
'अरहम'
ये
आपका
दुख
भी
रह
न
जाए
किसी
की
आँखों
में
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Mohd Arham
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अब
अकेले
ही
देखता
हूॅं
उसे
वो
जो
तस्वीर
साथ
खींची
थी
Mohd Arham
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मोहब्बत
हो
गई
है
खेल
की
बाज़ी
बिछड़
के
अब
कोई
लैला
नहीं
मरती
Mohd Arham
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मुझे
अब
ईद
की
ख़ुशियाँ
नहीं
है
कहीं
तो
खो
गया
बचपन
हमारा
Mohd Arham
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