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Alankrat Srivastava
hamaara bhi hai thoda naam dilli men
hamaara bhi hai thoda naam dilli men | हमारा भी है थोड़ा नाम दिल्ली में
- Alankrat Srivastava
हमारा
भी
है
थोड़ा
नाम
दिल्ली
में
सुनो
के
हम
भी
हैं
बदनाम
दिल्ली
में
किसी
भी
काम
के
ख़ातिर
भटकना
भी
है
इक
बेहद
ज़रूरी
काम
दिल्ली
मैं
सुब्ह
जाना
की
वो
दिल्ली
निवासी
है
बितानी
है
मुझे
अब
शाम
दिल्ली
में
सभी
को
छोड़
बस
इक
दिन
अचानक
से
हो
जाना
है
मुझे
गुमनाम
दिल्ली
में
- Alankrat Srivastava
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मसाइल
तो
बहुत
से
हैं
मगर
बस
एक
ही
हल
है
सहरस
शाम
तक
सर
मेरा
है
बेगम
की
चप्पल
है
मेरे
मालिक
भला
इस
सेे
बुरी
भी
क्या
सज़ा
होगी
मेरा
शादीशुदा
होना
ही
दोज़ख़
की
रिहर्सल
है
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Paplu Lucknawi
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मैं
तमाम
दिन
का
थका
हुआ
तू
तमाम
शब
का
जगा
हुआ
ज़रा
ठहर
जा
इसी
मोड़
पर
तेरे
साथ
शाम
गुज़ार
लूँ
Bashir Badr
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कोई
इशारा
दिलासा
न
कोई
वा'दा
मगर
जब
आई
शाम
तिरा
इंतिज़ार
करने
लगे
Waseem Barelvi
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कभी
तो
नस्ल-ओ-वतन-परस्ती
की
तीरगी
को
शिकस्त
होगी
कभी
तो
शाम-ए-अलम
मिटेगी
कभी
तो
सुब्ह-ए-ख़ुशी
मिलेगी
Abul mujahid zaid
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शाम
थी
हिज्र
की
हाल
मत
पूछना
आँख
थकने
लगे
तो
जिगर
रो
पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
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दिल
ना-उमीद
तो
नहीं
नाकाम
ही
तो
है
लंबी
है
ग़म
की
शाम
मगर
शाम
ही
तो
है
Faiz Ahmad Faiz
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सुब्ह
होती
है
शाम
होती
है
उम्र
यूँँही
तमाम
होती
है
Munshi Amirullah Tasleem
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मुँह
पर
नक़ाब-ए-ज़र्द
हर
इक
ज़ुल्फ़
पर
गुलाल
होली
की
शाम
ही
तो
सहर
है
बसंत
की
Lala Madhav Ram Jauhar
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तू
है
सूरज
तुझे
मालूम
कहाँ
रात
का
दुख
तू
किसी
रोज़
मेरे
घर
में
उतर
शाम
के
बाद
Farhat Abbas Shah
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वो
न
आएगा
हमें
मालूम
था
इस
शाम
भी
इंतिज़ार
उस
का
मगर
कुछ
सोचकर
करते
रहे
Parveen Shakir
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नास्तिक
भी
गर
तेरी
ये
मुस्कुराहट
देख
लें
तो
छोड़
कर
विज्ञान
तेरे
रूप
की
पूजा
करेंगे
Alankrat Srivastava
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हर
घड़ी
हर
पहर
तुम
मेरे
पास
हो
तुम
बहुत
ख़ूब-सूरत
सा
एहसास
हो
Alankrat Srivastava
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जीवन
में
खोना
पाना
लगा
रहा
लोगों
का
आना
जाना
लगा
रहा
Alankrat Srivastava
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फ़लां
ने
कहा
है
फ़लाने
से
हैं
हम
की
हुलिए
से
देखो
दिवाने
से
हैं
हम
हैं
सुनते
नहीं
हम
किसी
आदमी
की
अलग
कुछ
कहाँ
है?
ज़माने
से
हैं
हम
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Alankrat Srivastava
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अब
तो
ग़लती
से
कुछ
ग़ज़लें
होती
हैं
तुम
से
भी
तो
कम-कम
बातें
होती
हैं
Alankrat Srivastava
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