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Aqib khan
betahaasha ishq karne ki saza milni hi thii
betahaasha ishq karne ki saza milni hi thii | बेतहाशा इश्क़ करने की सज़ा मिलनी ही थी
- Aqib khan
बेतहाशा
इश्क़
करने
की
सज़ा
मिलनी
ही
थी
सो
तुम्हें
भी
हो
मुबारक
यार
मेरे
बेबसी
- Aqib khan
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ये
जब्र
भी
देखा
है
तारीख़
की
नज़रों
ने
लम्हों
ने
ख़ता
की
थी
सदियों
ने
सज़ा
पाई
Muzaffar Razmi
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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हसीन
लड़की
से
दिल
लगाना
भी
इक
ख़ता
है
मुझे
पता
है
अगर
सज़ा
में
मिले
क़ज़ा
तो
अलग
मज़ा
है
मुझे
पता
है
Jatin shukla
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तोड़
कर
तुझको
भला
मेरा
भी
क्या
बन
जाता
उल्टा
मैं
ख़ुद
की
मुहब्बत
प
सज़ा
बन
जाता
जितनी
कोशिश
है
तिरी
एक
तवज्जोह
के
लिए
उस
सेे
कम
में
तो
मैं
दुनिया
का
ख़ुदा
बन
जाता
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Ashutosh Vdyarthi
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आज
पैवंद
की
ज़रूरत
है
ये
सज़ा
है
रफ़ू
न
करने
की
Fahmi Badayuni
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मुन्सिफ़
हो
अगर
तुम
तो
कब
इंसाफ़
करोगे
मुजरिम
हैं
अगर
हम
तो
सज़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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बिछड़ते
वक़्त
भी
हिम्मत
नहीं
जुटा
पाया
कभी
भी
उस
को
गले
से
नहीं
लगा
पाया
किसी
को
चाहते
रहने
की
सज़ा
पाई
है
मैं
चार
साल
में
लड़की
नहीं
पटा
पाया
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Shadab Asghar
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या
तो
जो
ना-फ़हम
हैं
वो
बोलते
हैं
इन
दिनों
या
जिन्हें
ख़ामोश
रहने
की
सज़ा
मालूम
है
Shuja Khawar
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मेरी
बाँहों
में
बहकने
की
सज़ा
भी
सुन
ले
अब
बहुत
देर
में
आज़ाद
करूँँगा
तुझ
को
Jaun Elia
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मेरे
तरकश
में
सारे
तीर
थे
और
वो
मुझ
सेे
क़त्ल
फिर
भी
हो
न
पाया
Aqib khan
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अब
तो
क्या
ही
बचा
है
जीवन
में
मेरा
तू
भी
नहीं
ख़ुदा
भी
नहीं
Aqib khan
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हमको
ख़राब
वक़्त
में
अंदाज़ा
ये
हुआ
कुछ
आदतें
ख़राब
भी
रखनी
ही
चाहिए
Aqib khan
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उसे
अपना
समझ
बैठे,
मगर
ये
भूल
बैठे
थे
ज़मीं
और
आसमाँ
मिलते
नज़र
आते
हैं
दूरी
से
Aqib khan
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मुहब्बत
की
हिमायत
करने
वालों
बचा
लो
मिल
के
इसको
नफ़रतों
से
Aqib khan
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