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Abid aseer
mujhe vo yaad meraa bachpana dilaati hai
mujhe vo yaad meraa bachpana dilaati hai | मुझे वो याद मेरा बचपना दिलाती है
- Abid aseer
मुझे
वो
याद
मेरा
बचपना
दिलाती
है
उछल
उछल
के
वो
बारिश
में
जब
नहाती
है
मैं
जिसके
सिर्फ़
तसव्वुर
से
मुस्कुराता
था
अब
उसकी
याद
मुझे
रात
दिन
रुलाती
है
- Abid aseer
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सौ
चाँद
भी
चमकेंगे
तो
क्या
बात
बनेगी
तुम
आए
तो
इस
रात
की
औक़ात
बनेगी
Dagh Dehlvi
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क्या
बैठ
जाएँ
आन
के
नज़दीक
आप
के
बस
रात
काटनी
है
हमें
आग
ताप
के
कहिए
तो
आप
को
भी
पहन
कर
मैं
देख
लूँ
मा'शूक़
यूँँ
तो
हैं
ही
नहीं
मेरी
नाप
के
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Farhat Ehsaas
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ख़मोश
झील
के
पानी
में
वो
उदासी
थी
कि
दिल
भी
डूब
गया
रात
माहताब
के
साथ
Rehman Faris
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दिन
में
मिल
लेते
कहीं
रात
ज़रूरी
थी
क्या?
बेनतीजा
ये
मुलाक़ात
ज़रूरी
थी
क्या
मुझ
सेे
कहते
तो
मैं
आँखों
में
बुला
लेता
तुम्हें
भीगने
के
लिए
बरसात
ज़रूरी
थी
क्या
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Abrar Kashif
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वो
मुझको
जिस
तरह
से
दुआएँ
था
दे
रहा
मैं
तो
समझ
गया
ये
क़यामत
की
रात
हैं
AMAN RAJ SINHA
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बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
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Hameed Sarwar Bahraichi
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सोचता
हूँ
कि
उस
की
याद
आख़िर
अब
किसे
रात
भर
जगाती
है
Jaun Elia
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आज
की
रात
दिवाली
है
दिए
रौशन
हैं
आज
की
रात
ये
लगता
है
मैं
सो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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लड़ाई
है
तो
अच्छा
रात-भर
यूँँ
ही
बसर
कर
लो
हम
अपना
मुँह
इधर
कर
लें
तुम
अपना
मुँह
उधर
कर
लो
Muztar Khairabadi
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मैं
सो
रहा
हूँ
तेरे
ख़्वाब
देखने
के
लिए
ये
आरज़ू
है
कि
आँखों
में
रात
रह
जाए
Shakeel Azmi
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मेरी
आँखों
से
खूँ
निकलता
है
और
सीने
में
दिल
उछलता
है
दिल
बहलता
नहीं
है
रोने
से
ख़ूब
रोने
से
दिल
बहलता
है
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Abid aseer
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आप
से
इक
सवाल
है
मेरा
आप
इतने
हसीन
कैसे
हो
Abid aseer
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जो
कुछ
है
तिरे
ग़म
में
हुआ
क्यूँ
नहीं
सुनता
ऐ
शख़्स
मिरे
दिल
की
सदा
क्यूँ
नहीं
सुनता
ये
सोच
के
रोता
हूँ
की
रोने
की
सदाएँ
इंसान
तो
सुनता
है
ख़ुदा
क्यूँ
नहीं
सुनता
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Abid aseer
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हाथों
से
उसकी
ज़हर
पि
यूँँ
ये
है
आरज़ू
मिल
जाए
ज़िन्दगी
को
सुकूँ
ये
है
आरज़ू
दिल
की
रगों
को
अपने
सलीक़े
से
खींच
कर
उस
सेे
ही
ज़ख़्म-ए-दिल
को
सि
यूँँ
ये
है
आरज़ू
साक़ी
पिलाए
जाम
मेरी
आरज़ू
नहीं
साक़ी
के
साथ
जाम
पि
यूँँ
ये
है
आरज़ू
सारे
गुलाब
अपने
क़लम
में
निचोड़
कर
होंठों
पे
उसके
शे'र
लिखूँ
ये
है
आरज़ू
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Abid aseer
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