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Abid aseer
haathon se uski zehar piyuun ye hai aarzoo
haathon se uski zehar piyuun ye hai aarzoo | हाथों से उसकी ज़हर पि
- Abid aseer
हाथों
से
उसकी
ज़हर
पि
यूँँ
ये
है
आरज़ू
मिल
जाए
ज़िन्दगी
को
सुकूँ
ये
है
आरज़ू
दिल
की
रगों
को
अपने
सलीक़े
से
खींच
कर
उस
सेे
ही
ज़ख़्म-ए-दिल
को
सि
यूँँ
ये
है
आरज़ू
साक़ी
पिलाए
जाम
मेरी
आरज़ू
नहीं
साक़ी
के
साथ
जाम
पि
यूँँ
ये
है
आरज़ू
सारे
गुलाब
अपने
क़लम
में
निचोड़
कर
होंठों
पे
उसके
शे'र
लिखूँ
ये
है
आरज़ू
- Abid aseer
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वो
गुल-फ़रोश
कहाँ
अब
गुलाब
किस
से
लूँ
नहीं
रहा
मिरा
साक़ी
शराब
किस
से
लूँ
Anwar Shaoor
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शराब
खींची
है
सब
ने
ग़रीब
के
ख़ूँ
से
तू
अब
अमीर
के
ख़ूँ
से
शराब
पैदा
कर
तू
इंक़लाब
की
आमद
का
इंतिज़ार
न
कर
जो
हो
सके
तो
अभी
इंक़लाब
पैदा
कर
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Asrar Ul Haq Majaz
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लब
हैं
जैसे
गुल
सुमबुल
रंग-ए-याक़ूती
ख़ुद
को
मैख़ाना
तितली
का
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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मुझे
ये
फ़िक्र
सब
की
प्यास
अपनी
प्यास
है
साक़ी
तुझे
ये
ज़िद
कि
ख़ाली
है
मिरा
पैमाना
बरसों
से
Majrooh Sultanpuri
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आए
कुछ
अब्र
कुछ
शराब
आए
इस
के
बाद
आए
जो
अज़ाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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ये
मय-कदा
है
यहाँ
हैं
गुनाह
जाम-ब-दस्त
वो
मदरसा
है
वो
मस्जिद
वहाँ
मिलेगा
सवाब
Ali Sardar Jafri
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बोसाँ
लबाँ
सीं
देने
कहा
कह
के
फिर
गया
प्याला
भरा
शराब
का
अफ़्सोस
गिर
गया
Abroo Shah Mubarak
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वो
गर
शराब
है
तो
समझो
कि
मैं
नशा
हूँ
कुछ
इस
तरह
से
भीतर
उस
शख़्स
के
बसा
हूँ
Harsh saxena
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नमकीं
गोया
कबाब
हैं
फीके
शराब
के
बोसा
है
तुझ
लबाँ
का
मज़े-दार
चटपटा
Abroo Shah Mubarak
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जो
उन
को
लिपटा
के
गाल
चूमा
हया
से
आने
लगा
पसीना
हुई
है
बोसों
की
गर्म
भट्टी
खिंचे
न
क्यूँँकर
शराब-ए-आरिज़
Ahmad Husain Mail
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जो
कुछ
है
तिरे
ग़म
में
हुआ
क्यूँ
नहीं
सुनता
ऐ
शख़्स
मिरे
दिल
की
सदा
क्यूँ
नहीं
सुनता
ये
सोच
के
रोता
हूँ
की
रोने
की
सदाएँ
इंसान
तो
सुनता
है
ख़ुदा
क्यूँ
नहीं
सुनता
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Abid aseer
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मुझे
वो
याद
मेरा
बचपना
दिलाती
है
उछल
उछल
के
वो
बारिश
में
जब
नहाती
है
मैं
जिसके
सिर्फ़
तसव्वुर
से
मुस्कुराता
था
अब
उसकी
याद
मुझे
रात
दिन
रुलाती
है
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Abid aseer
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मेरी
आँखों
से
खूँ
निकलता
है
और
सीने
में
दिल
उछलता
है
दिल
बहलता
नहीं
है
रोने
से
ख़ूब
रोने
से
दिल
बहलता
है
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Abid aseer
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आप
से
इक
सवाल
है
मेरा
आप
इतने
हसीन
कैसे
हो
Abid aseer
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