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Abid aseer
jo kuchh hai tire gham men hua kyuuñ nahin sunta
jo kuchh hai tire gham men hua kyuuñ nahin sunta | जो कुछ है तिरे ग़म में हुआ क्यूँ नहीं सुनता
- Abid aseer
जो
कुछ
है
तिरे
ग़म
में
हुआ
क्यूँ
नहीं
सुनता
ऐ
शख़्स
मिरे
दिल
की
सदा
क्यूँ
नहीं
सुनता
ये
सोच
के
रोता
हूँ
की
रोने
की
सदाएँ
इंसान
तो
सुनता
है
ख़ुदा
क्यूँ
नहीं
सुनता
- Abid aseer
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मशहूर
भी
हैं
बदनाम
भी
हैं
ख़ुशियों
के
नए
पैग़ाम
भी
हैं
कुछ
ग़म
के
बड़े
इनाम
भी
हैं
पढ़िए
तो
कहानी
काम
की
है
Anjum Barabankvi
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पुराने
घाव
पर
नाखून
उसका
लग
गया
वरना
गुज़र
कर
दर्द
ये
हद
से
दवा
होने
ही
वाला
था
Atul K Rai
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ज़रा
सा
ग़म
हुआ
और
रो
दिए
हम
बड़ी
नाज़ुक
तबीअत
हो
गई
है
Shahzad Ahmad
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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इतने
दुख
से
भरी
है
ये
दुनिया
आँख
खुलते
ही
आँख
भर
आए
shampa andaliib
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कभी
हँसता
हूँ
तो
आँखें
कभी
मैं
नम
भी
रखता
हूँ
हर
इक
मुस्कान
के
पीछे
हज़ारों
ग़म
भी
रखता
हूँ
शिफ़ा
भी
दे
नहीं
सकता
मुझे
कोई
मेरा
अपना
नतीजन
मैं
मिरे
ज़ख़्मों
का
ख़ुद
मरहम
भी
रखता
हूँ
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Shubham Dwivedi
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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मुझे
छोड़
दे
मेरे
हाल
पर
तिरा
क्या
भरोसा
है
चारा-गर
ये
तिरी
नवाज़िश-ए-मुख़्तसर
मेरा
दर्द
और
बढ़ा
न
दे
Shakeel Badayuni
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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हाथों
से
उसकी
ज़हर
पि
यूँँ
ये
है
आरज़ू
मिल
जाए
ज़िन्दगी
को
सुकूँ
ये
है
आरज़ू
दिल
की
रगों
को
अपने
सलीक़े
से
खींच
कर
उस
सेे
ही
ज़ख़्म-ए-दिल
को
सि
यूँँ
ये
है
आरज़ू
साक़ी
पिलाए
जाम
मेरी
आरज़ू
नहीं
साक़ी
के
साथ
जाम
पि
यूँँ
ये
है
आरज़ू
सारे
गुलाब
अपने
क़लम
में
निचोड़
कर
होंठों
पे
उसके
शे'र
लिखूँ
ये
है
आरज़ू
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Abid aseer
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मुझे
वो
याद
मेरा
बचपना
दिलाती
है
उछल
उछल
के
वो
बारिश
में
जब
नहाती
है
मैं
जिसके
सिर्फ़
तसव्वुर
से
मुस्कुराता
था
अब
उसकी
याद
मुझे
रात
दिन
रुलाती
है
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Abid aseer
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मेरी
आँखों
से
खूँ
निकलता
है
और
सीने
में
दिल
उछलता
है
दिल
बहलता
नहीं
है
रोने
से
ख़ूब
रोने
से
दिल
बहलता
है
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Abid aseer
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आप
से
इक
सवाल
है
मेरा
आप
इतने
हसीन
कैसे
हो
Abid aseer
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