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Abha sethi
kacche hain ham lad na paa.e
kacche hain ham lad na paa.e | कच्चे हैं हम लड़ न पाए
- Abha sethi
कच्चे
हैं
हम
लड़
न
पाए
बख़्त
शातिर
है
हमारा
- Abha sethi
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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मिले
किसी
से
गिरे
जिस
भी
जाल
पर
मेरे
दोस्त
मैं
उसको
छोड़
चुका
उसके
हाल
पर
मेरे
दोस्त
ज़मीं
पे
सबका
मुक़द्दर
तो
मेरे
जैसा
नहीं
किसी
के
साथ
तो
होगा
वो
कॉल
पर
मेरे
दोस्त
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Ali Zaryoun
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जो
मिल
गया
उसी
को
मुक़द्दर
समझ
लिया
जो
खो
गया
मैं
उस
को
भुलाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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कोई
भी
रोक
न
पाता,
गुज़र
गया
होता
मेरा
नसीब-ए-मोहब्बत
सँवर
गया
होता
न
आईं
होती
जो
बेग़म
मेरी
अयादत
को
मैं
अस्पताल
की
नर्सों
पर
मर
गया
होता
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Paplu Lucknawi
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परिंद
पेड़
से
परवाज़
करते
जाते
हैं
कि
बस्तियों
का
मुक़द्दर
बदलता
जाता
है
Asad Badayuni
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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न
हुआ
नसीब
क़रार-ए-जाँ
हवस-ए-क़रार
भी
अब
नहीं
तिरा
इंतिज़ार
बहुत
किया
तिरा
इंतिज़ार
भी
अब
नहीं
तुझे
क्या
ख़बर
मह-ओ-साल
ने
हमें
कैसे
ज़ख़्म
दिए
यहाँ
तिरी
यादगार
थी
इक
ख़लिश
तिरी
यादगार
भी
अब
नहीं
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Jaun Elia
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मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
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Paplu Lucknawi
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इस
बेवफ़ाई
पर
मुझे
हैरत
नहीं
तुझको
पा
लूँ
ऐसी
मिरी
क़िस्मत
नहीं
Harsh saxena
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हैं
मुक़म्मल
कुछ
न
बेबस
रह
गए
ख़्वाब
सारे
रेत
बन
के
ढह
गए
रहते
थे
पलकों
पे
जिनकी
हम
कभी
अपने
भी
हमको
बुरा
वो
कह
गए
साथ
बे-मतलब
नहीं
मिलता
यहाँ
सोच
कर
ये
मतलबी
भी
सह
गए
बस
हुआ
तक़दीर
या
है
कुछ
अभी
तीर
तरकश
में
है
कितने
रह
गए
ज़ीस्त
की
'आभा'
मरम्मत
में
कई
ख़ुश-नुमा
लम्हे
जिए
बिन
बह
गए
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Abha sethi
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कितनों
की
नींदें
ले
गई
पाज़ेब
ये
जी
आपकी
मख़मल
सी
चाँदी
की
ज़री
पाज़ेब
ये
जी
आपकी
Abha sethi
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पाया
न
तुम्हें
खो
बैठे
ख़ुद
को
ही
हम
पागल
इस
दिल
ने
भी
की
नादानी
है
Abha sethi
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ये
इश्क़
ज़िंदा
रखने
को
हैं
टूट
जाते
गुल
कई
Abha sethi
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खेलो
न
इस
इक
ज़ीस्त
से
मिलती
नहीं
दो
तीन
है
Abha sethi
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