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Abha sethi
hain muqammal kuchh na bebas rah ga.e
hain muqammal kuchh na bebas rah ga.e | हैं मुक़म्मल कुछ न बेबस रह गए
- Abha sethi
हैं
मुक़म्मल
कुछ
न
बेबस
रह
गए
ख़्वाब
सारे
रेत
बन
के
ढह
गए
रहते
थे
पलकों
पे
जिनकी
हम
कभी
अपने
भी
हमको
बुरा
वो
कह
गए
साथ
बे-मतलब
नहीं
मिलता
यहाँ
सोच
कर
ये
मतलबी
भी
सह
गए
बस
हुआ
तक़दीर
या
है
कुछ
अभी
तीर
तरकश
में
है
कितने
रह
गए
ज़ीस्त
की
'आभा'
मरम्मत
में
कई
ख़ुश-नुमा
लम्हे
जिए
बिन
बह
गए
- Abha sethi
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तसव्वुर
में
भी
अब
वो
बे-नक़ाब
आते
नहीं
मुझ
तक
क़यामत
आ
चुकी
है
लोग
कहते
हैं
शबाब
आया
Hafeez Jalandhari
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यही
तलब
है
जो
जीना
सिखाए
जाती
है
तुम्हारे
ख़्वाब
न
देखें
तो
कब
के
मर
जाएँ
Subhan Asad
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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जब
भी
कश्ती
मिरी
सैलाब
में
आ
जाती
है
माँ
दु'आ
करती
हुई
ख़्वाब
में
आ
जाती
है
Munawwar Rana
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मेरे
हाथों
में
कुछ
गुलाब
तो
हैं
जो
न
मुमकिन
रहे
वो
ख़्वाब
तो
हैं
Shaista mufti
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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नए
दौर
के
नए
ख़्वाब
हैं
नए
मौसमों
के
गुलाब
हैं
ये
मोहब्बतों
के
चराग़
हैं
इन्हें
नफ़रतों
की
हवा
न
दे
Bashir Badr
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रो
रही
हूँ
कि
तुम
दिख
न
पाए
कहीं
हाए
ये
ख़्वाब
सिंदूर
है
माँग
में
Neeraj Neer
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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मैंने
मुद्दत
से
कोई
ख़्वाब
नहीं
देखा
है
हाथ
रख
दे
मेरी
आँखों
पे
कि
नींद
आ
जाए
Waseem Barelvi
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कहते
नहीं
दर्द-ए-दिल
हम
को
भी
सताता
है
ज़हमत
का
तमाशा
तो
सब
को
नहीं
आता
है
Abha sethi
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कर
दिया
हवाले
अब
थाम
ले
या
ठुकरा
दे
हैं
थिरकते
जिस्म-ओ-जाँ
तेरे
इश्क़
में
बे-सुध
Abha sethi
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कितनों
की
नींदें
ले
गई
पाज़ेब
ये
जी
आपकी
मख़मल
पे
चाँदी
की
ज़री
पाज़ेब
ये
जी
आपकी
पल
पल
खनकती
बातें
करती
है
लगे
जैसे
कि
हो
चंचल
सी
बातूनी
सखी
पाज़ेब
ये
जी
आपकी
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Abha sethi
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ज़ुल्फ़ों
में
सजा
मुझे
लो
अपनी
तुम
बना
के
गुल
बन
सदा-बहार
मैं
खिला
रहूँगा
साए
में
Abha sethi
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हैं
खोटे
जब
नज़र
में
सब
ही
दुनिया
की
तो
हो
बे-फ़िक्र
ये
जीवन
बिताया
कर
Abha sethi
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