vo paas kya zaraa sa muskuraa ke baith gaya | वो पास क्या ज़रा सा मुस्कुरा के बैठ गया

  - Zubair Ali Tabish
वोपासक्याज़रासामुस्कुराकेबैठगया
मैंइसमज़ाक़कोदिलसेलगाकेबैठगया
जबउसकीबज़्ममेंदार-ओ-रसनकीबातचली
मैंझटसेउठगयाऔरआगेकेबैठगया
दरख़्तकाटकेजबथकगयालकड़-हारा
तोइकदरख़्तकेसाएमेंजाकेबैठगया
तुम्हारेदरसेमैंकबउठनाचाहताथामगर
येमेरादिलहैकिमुझकोउठाकेबैठगया
जोमेरेवास्तेकुर्सीलगायाकरताथा
वोमेरीकुर्सीसेकुर्सीलगाकेबैठगया
फिरउसकेबा'दकईलोगउठकेजानेलगे
मैंउठकेजानेकानुस्ख़ाबताकेबैठगया
  - Zubair Ali Tabish
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