hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Zohair Ahmad Sahil
kisi ko apna banaa raha hooñ
kisi ko apna banaa raha hooñ | किसी को अपना बना रहा हूँ
- Zohair Ahmad Sahil
किसी
को
अपना
बना
रहा
हूँ
वफ़ा
को
दिल
से
निभा
रहा
हूँ
ये
हाल
अपना
बता
रहा
हूँ
ज़वाब
तुमको
सुना
रहा
हूँ
बदल
रहा
हूँ
मैं
वक़्त
मेरा
मैं
अपनी
हस्ती
बचा
रहा
हूँ
कभी
तो
ख़ूँ
में
नहा
रहा
था
अभी
मैं
ख़ुद
को
सजा
रहा
हूँ
हमें
कहानी
सुनाओ
क्यूँ
तुम
मैं
दुनिया
अपनी
बसा
रहा
हूँ
ये
बात
सारी
है
निकली
दिल
से
जो
दिल
था
टूटा
बना
रहा
हूँ
जो
हाल
सारा
सुना
रहा
था
उसी
से
मिलने
को
जा
रहा
हूँ
नया
दिया
इक
जला
रहा
हूँ
मैं
घर
को
'जोहैर'
आ
रहा
हूँ
- Zohair Ahmad Sahil
Download Ghazal Image
रात
ढल
जाएगी
तब
लौट
के
घर
जाऊँगा
क़ुर्ब-ए-तन्हाई
से
वरना
मैं
बिखर
जाऊँगा
बस
यही
सोच
के
सूरज
की
तरह
तन्हा
हूँ
ग़म
के
शोलों
में
पिघल
कर
मैं
निखर
जाऊँगा
तू
मिरा
है
तो
मिरे
सामने
हर
पल
रहना
तूने
मुँह
मोड़
लिया
गर
तो
किधर
जाऊँगा
Read Full
Zohair Ahmad Sahil
Download Image
0 Likes
मेरा
इस
तरह
तू
भला
कर
गया
मेरे
दिल
के
ग़म
की
दवा
कर
गया
न
जाने
गिरा
दिल
में
क्या
दोस्तों
कोई
फिर
से
आँसू
बहाकर
गया
मकीं
था
जो
दिल
में
बुलाओ
उसे
जो
हर
बात
दिल
में
छुपा
कर
गया
दिखाऊँ
मैं
क्या
दर्द
अपना
तुझे
मुझे
हिज्र
तेरा
फ़ना
कर
गया
जहाँ
एक
फंदा
लगा
है
नया
वहीं
पैर
अपना
फँसा
कर
गया
कहानी
वफ़ा
की
अधूरी
रही
यूँँॅं
ही
बस
वो
बातें
बना
कर
गया
Read Full
Zohair Ahmad Sahil
Download Image
0 Likes
उस
दिल
में
मैं
बसा
नहीं
क्या
फ़र्ज़
की
अदा
नहीं
वो
कहती
हैं
वफ़ा
नहीं
क्या
मर्ज़
की
दवा
नहीं
ग़म
तो
बहुत
मिले
मगर
ये
ज़ख़्म
तो
सिला
नहीं
तकलीफ़
क्या
कहें
मगर
उस
रस्ते
से
गिला
नहीं
Read Full
Zohair Ahmad Sahil
Send
Download Image
0 Likes
तुम
से
कोई
शिकायत
नहीं
देखने
की
सियासत
नहीं
चादरों
में
लपेटा
हुआ
मैं
किसी
की
भी
हाजत
नहीं
वापसी
का
तो
इमकान
है
पर
किसी
से
रफ़ाक़त
नहीं
तुम
से
मिलकर
बदल
तो
गया
मुझ
में
कोई
शराफ़त
नहीं
मैं
भला
क्यूँ
उसे
देखता
मेरी
उन
सेे
क़यादत
नहीं
झड़
गए
पत्ते
एहसास
के
अब
किसी
तौर
उलफ़त
नहीं
Read Full
Zohair Ahmad Sahil
Download Image
0 Likes
देखा
था
इक
ख़्वाब
किसी
ख़्वाब
में
छू
लिया
था
मैं
उन्हें
आदाब
में
हाथ
उठाया
था
वो
मेरी
तरफ़
देखते
मैं
रह
गया
तालाब
में
ख़ास
है
क्या
जो
मैं
सुनाऊँ
तुम्हें
यार
ही
था
खेल
के
ग़र्क़ाब
में
हारना
था
ही
नहीं
तक़दीर
में
सो
चला
वो
जीत
कर
अहबाब
में
सो
गया
था
वो
कहीं
पर
सहरा
में
जल
गया
'जोहैर'
इस
अलक़ाब
में
Read Full
Zohair Ahmad Sahil
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Irada Shayari
Kiss Shayari
Corruption Shayari
Waqt Shayari
Mayoosi Shayari