kisi ko apna banaa raha hooñ | किसी को अपना बना रहा हूँ

  - Zohair Ahmad Sahil
किसीकोअपनाबनारहाहूँ
वफ़ाकोदिलसेनिभारहाहूँ
येहालअपनाबतारहाहूँ
ज़वाबतुमकोसुनारहाहूँ
बदलरहाहूँमैंवक़्तमेरा
मैंअपनीहस्तीबचारहाहूँ
कभीतोख़ूँमेंनहारहाथा
अभीमैंख़ुदकोसजारहाहूँ
हमेंकहानीसुनाओक्यूँतुम
मैंदुनियाअपनीबसारहाहूँ
येबातसारीहैनिकलीदिलसे
जोदिलथाटूटाबनारहाहूँ
जोहालसारासुनारहाथा
उसीसेमिलनेकोजारहाहूँ
नयादियाइकजलारहाहूँ
मैंघरको'जोहैर'रहाहूँ
  - Zohair Ahmad Sahil
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