rahm-e-maadar se nikalna mira be-sood hua | रहम-ए-मादर से निकलना मिरा बे-सूद हुआ

  - Zahid Dar
रहम-ए-मादरसेनिकलनामिराबे-सूदहुआ
आजभीक़ैदहूँमैं
हुक्म-ए-मादरकोमैंतब्दीलकरूँँ
माँकीनफ़रतभरीआँखोंसेकहींदूरचलाजाऊँमैं
बे-नियाज़ीसेफिरूँ
पापकेकाँटेचुनकर
रूहनापाककरूँँ
गीतशहवतकेहवसकेसुनकर
ज़ेहनबे-बाककरूँँ
ऐसेजीवनकीहैहसरतअबतक
प्यार...सबकहतेहैंवोप्यारमुझेकरतीहै
प्यारकीराखतलेसोयापड़ाहूँकबसे
झूटकहतेहैंमैंबेज़ारहुआहूँसबसे
फिरलपकउट्ठेगावोशोला,पुर-उम्मीदहूँमैं
प्यारकीराखतलेदबकेहैजोदूदहुआ
  - Zahid Dar
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