aao aa jaao qareeb aao | आओ आ जाओ क़रीब आओ

  - Zaheer Siddiqui
आओजाओक़रीबआओ
किकुछबातबने
इतनीदूरीहैकिआवाज़पहुँचतीहीनहीं
मैंकिसीग़ैरज़बाँकेअल्फ़ाज़
अपनेअशआ'रमेंशामिलतोनहींकरताहूँ
दुखतोइसबातकाहैतुमयेसमझतेहीनहीं
मेरेसीनेमेंमचलताहै
तुम्हारादुखभी
मेरेअल्फ़ाज़मेंशामिलहैतुम्हारीआवाज़
मेरेजज़्बातमेंख़ुफ़्ताहैं
तुम्हारेजज़्बात
मैंजोअदपरहूँतोबसएकहीमक़्सदहैमिरा
फ़र्शसेअर्शकाकुछराब्ताबाक़ीतोरहे
मैंहूँजिसज़ीनेपे
तुमउसपेनहींसकते
औरमैंनीचेबहुतनीचेनहींजासकता
येतफ़ावुततोअज़लहीसेहैक़ाएम
लेकिन
तुमकभीइतनेगराँगोशथे
सीढ़ियाँजितनीभीऊपरजाएँ
पाँवतोउनकेज़मींसेहीलगेरहतेहैं
इकज़राक़ुर्ब-ए-समाअ'तकेलिए
कितनेहीज़ीनेमैंउतराहूँतुम्हारीख़ातिर
झाड़करअपनेबंदकीमिट्टी
चंदज़ीनेहीसही
तुमभीतोऊपरआओ
औरनीचेउतारोमिरेसामेअ'मुझको
  - Zaheer Siddiqui
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