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Zeeshan kaavish
jaam aankhoñ se pee liya maine
jaam aankhoñ se pee liya maine | जाम आँखों से पी लिया मैंने
- Zeeshan kaavish
जाम
आँखों
से
पी
लिया
मैंने
जितना
जीना
था
जी
लिया
मैंने
- Zeeshan kaavish
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वो
गुल-फ़रोश
कहाँ
अब
गुलाब
किस
से
लूँ
नहीं
रहा
मिरा
साक़ी
शराब
किस
से
लूँ
Anwar Shaoor
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ता'रीफ़
सुन
रहा
हूँ
बहुत
तेरे
हाथ
की
साक़ी
मेरे
लिए
भी
ज़रा
सी
निकाल
दे
Shadab Javed
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बोसाँ
लबाँ
सीं
देने
कहा
कह
के
फिर
गया
प्याला
भरा
शराब
का
अफ़्सोस
गिर
गया
Abroo Shah Mubarak
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अलग
बैठे
थे
फिर
भी
आँख
साक़ी
की
पड़ी
हम
पर
अगर
है
तिश्नगी
कामिल
तो
पैमाने
भी
आएँगे
Majrooh Sultanpuri
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मुझे
ये
फ़िक्र
सब
की
प्यास
अपनी
प्यास
है
साक़ी
तुझे
ये
ज़िद
कि
ख़ाली
है
मिरा
पैमाना
बरसों
से
Majrooh Sultanpuri
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इश्क़
में
धोखा
खाने
वाले
बिल्कुल
भी
मायूस
न
हो
इस
रस्ते
में
थोड़ा
आगे
मयख़ाना
भी
आता
है
Darpan
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आए
कुछ
अब्र
कुछ
शराब
आए
इस
के
बाद
आए
जो
अज़ाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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नशा
पिला
के
गिराना
तो
सब
को
आता
है
मज़ा
तो
तब
है
कि
गिरतों
को
थाम
ले
साक़ी
Allama Iqbal
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वो
गर
शराब
है
तो
समझो
कि
मैं
नशा
हूँ
कुछ
इस
तरह
से
भीतर
उस
शख़्स
के
बसा
हूँ
Harsh saxena
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दरिया
की
वुसअतों
से
उसे
नापते
नहीं
तन्हाई
कितनी
गहरी
है
इक
जाम
भर
के
देख
Adil Mansuri
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दर
से
उठते
हैं
तो
दीवार
से
लग
जाते
हैं
इक
झलक
उनकी
मगर
देख
नहीं
पाते
हैं
Zeeshan kaavish
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तीरगी
में
मत
बैठो
रौशनी
में
आ
जाओ
चाँद
का
ये
अरमाँ
है
चाँदनी
में
आ
जाओ
बेक़रार
है
ये
दिल
आपके
लिए
कब
से
छोड़
कर
झिझक
मेरी
ज़िंदगी
में
आ
जाओ
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Zeeshan kaavish
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हमने
वतन
के
वास्ते
क्या
ख़ूब
लिख
दिया
हमने
वतन
को
अपना
ही
महबूब
लिख
दिया
Zeeshan kaavish
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मुहब्बत
का
मुहब्बत
से
कोई
जब
नाम
लेता
है
किसी
का
हो
गया
है
वो
यही
पैग़ाम
देता
है
Zeeshan kaavish
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कभी
फूलों
से
कहता
है
कभी
भॅवरों
से
कहता
है
कभी
ये
दिल
मेरा
चुप
चाप
ही
हर
दर्द
सहता
है
यक़ीं
मानो
मैं
अपना
राज़
ए
दिल
तुम
को
बताता
हूँ
जो
मेरे
दिल
का
दुश्मन
है
वो
मेरे
दिल
में
रहता
है
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Zeeshan kaavish
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