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Zeeshan kaavish
muhabbat ka muhabbat se koi jab naam leta hai
muhabbat ka muhabbat se koi jab naam leta hai | मुहब्बत का मुहब्बत से कोई जब नाम लेता है
- Zeeshan kaavish
मुहब्बत
का
मुहब्बत
से
कोई
जब
नाम
लेता
है
किसी
का
हो
गया
है
वो
यही
पैग़ाम
देता
है
- Zeeshan kaavish
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चलो
करके
देखेंगे
इज़हार
अब
की
मुहब्बत
न
होगी
अदावत
तो
होगी
Tiwari Jitendra
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कभी
कभी
तो
झगड़ने
का
जी
भी
चाहेगा
मगर
ये
जंग
मोहब्बत
से
जीती
जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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किसी
भी
शख़्स
के
झूठे
दिलासे
में
नहीं
आती
कहानी
हो
अगर
लंबी
तराशे
में
नहीं
आती
जहाँ
में
अब
कहाँ
कोई
जो
मजनूँ
की
तरह
चाहे
मोहब्बत
इसलिए
भी
अब
तमाशे
में
नहीं
आती
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Ansar Ethvi
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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कितना
झूठा
था
अपना
सच्चा
इश्क़
हिज्र
से
दोनों
ज़िंदा
बच
निकले
Prit
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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पलट
कर
लौट
आने
में
मज़ा
भी
है
मुहब्बत
भी
बुलाकर
देख
लो
शायद
पलट
कर
लौट
आएँ
हम
Gaurav Singh
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जँचने
लगा
है
दर्द
मुझे
आपका
दिया
बर्बाद
करने
वाले
ने
ही
आसरा
दिया
कल
पहली
बार
लड़ने
की
हिम्मत
नहीं
हुई
मुझको
किसी
के
प्यार
ने
बुजदिल
बना
दिया
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Kushal Dauneria
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जो
राह-ए-इश्क़
में
गिर
कर
सँभल
नहीं
सकता
वो
ज़िंदगी
में
कोई
राह
चल
नहीं
सकता
जिसे
बसा
लिया
इक
बार
हमने
इस
दिल
में
हमारे
दिल
से
वो
हरगिज़
निकल
नहीं
सकता
ये
मेरा
दिल
है
मुहब्बत
का
ऐसा
सूरज
है
हो
वक़्त-ए-शाम
मगर
फिर
भी
ढल
नहीं
सकता
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Zeeshan kaavish
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अजी
छोड़िए
भी
ये
नफ़रत
की
बातें
बहुत
ही
बुरी
हैं
सियायत
की
बातें
उदासी
की
चादर
लपेटे
पड़ा
हूँ
करे
कोई
आके
मुहब्बत
की
बातें
तेरे
हुस्न
का
ज़िक्र
होगा
यक़ीनन
चलेंगी
जहाँ
भी
क़यामत
की
बातें
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Zeeshan kaavish
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तुझे
ख़बर
भी
है
ऐ
बे-वफ़ा
हज़ारों
ने
हयात
काट
दी
रो
रो
के
ग़म
के
मारों
ने
मिलूँ
मैं
चाँद
से
अपने
तो
किस
तरह
से
मिलूँ
फ़लक
को
घेर
लिया
है
कई
सितारों
ने
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Zeeshan kaavish
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वो
मुहब्बत
का
तलबगार
नहीं
हो
सकता
जो
सितमगर
है
उसे
प्यार
नहीं
हो
सकता
तेरे
होते
हुए
जो
चाँद
का
दीदार
करे
कुछ
भी
होगा
वो
समझदार
नहीं
हो
सकता
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Zeeshan kaavish
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सभी
पढ़ते
रहे
चेहरा
हमारा
किसी
ने
दिल
नहीं
देखा
हमारा
वो
हमको
हर
तरह
से
भा
गया
है
जिसे
भाया
नहीं
चेहरा
हमारा
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Zeeshan kaavish
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