zaKHmon ki munaajat men pinhaan vo asar tha | ज़ख़्मों की मुनाजात में पिन्हाँ वो असर था

  - Yusuf Jamal
ज़ख़्मोंकीमुनाजातमेंपिन्हाँवोअसरथा
आँखोंसेटपकताहुआआँसूभीगुहरथा
अश्कोंकीमअय्यतमेंथेमग़्मूमअंधेरे
सदमातकीहरसजमेंइकख़ौफ़काघरथा
पत्तेहोंकिफलसबकाथाइकऔरहीआलम
हैरतहैमगरइसपेकिबौनावोशजरथा
दरवाज़ेमकानोंकेहुएबंदसर-ए-शाम
कहतेहैंमगरयेकिजियालोंकानगरथा
कैसीवोहवसथीकिबनीमौजिब-ए-ताज़ीर
जन्नतसेनिकलवादियाकैसावोसमरथा
  - Yusuf Jamal
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