socha ki vaa ho sabz dareecha jo band tha | सोचा कि वा हो सब्ज़ दरीचा जो बंद था

  - Yusuf Jamal
सोचाकिवाहोसब्ज़दरीचाजोबंदथा
पीलाहटोंकाचेहराबहुतफ़िक्रमंदथा
हरसाँसथूकतीथीलहूज़र्दरंगका
हरशख़्सउसगलीकाअज़िय्यत-पसंदथा
मीठेतबस्सुमोंकोलिएसबसेबातकी
ख़ुदसेकियाकलामतोलबज़हर-क़ंदथा
बौनाथावोज़रूरमगरइसकेबावजूद
किरदारकेलिहाज़सेक़दकाबुलंदथा
मैंनेफ़सील-ए-शबकोमुक़द्दरनहींकिया
तीरा-शबीमेंघिरकेभीदिलअर्जुमंदथा
  - Yusuf Jamal
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