sar par dukh ka taaj suhaana lagta hai | सर पर दुख का ताज सुहाना लगता है

  - Yusuf Jamal
सरपरदुखकाताजसुहानालगताहै
मेराचेहराक्याशाहानालगताहै
जबमैंकच्चाफलथातोमहफ़ूज़थामैं
अबजोपकातोमुझपेनिशानालगताहै
शहर-ए-दिलकेख़्वाबकीक्याता'बीरकरूँँ
कभीनयायेकभीपुरानालगताहै
हाथोंमेंकश्कोललिएतूदेसदा
बहरोंकातोयेकाशानालगताहै
आईनेमेंदेखकेयेमहसूसहुआ
तेराचेहराक्यूँँबेगानालगताहै
  - Yusuf Jamal
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