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Yogendra Singh Raghuwanshi
tujhse rishta qaayam rakhne ko jaanaan
tujhse rishta qaayam rakhne ko jaanaan | तुझ सेे रिश्ता क़ायम रखने को जानाँ
- Yogendra Singh Raghuwanshi
तुझ
सेे
रिश्ता
क़ायम
रखने
को
जानाँ
जाने
कितनी
बार
गिराया
है
ख़ुद
को
- Yogendra Singh Raghuwanshi
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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दिवाली
भी
दिवाली
अब
नहीं
है
तुम्हारे
साथ
हर
दिन
थी
दिवाली
Tanoj Dadhich
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पता
करो
कि
मेरे
साथ
कौन
उतरा
था
ज़मीं
पे
कोई
अकेला
नहीं
उतरता
है
Ahmad Abdullah
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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किसी
ने
ख़्वाब
में
आकर
मुझे
ये
हुक्म
दिया
तुम
अपने
अश्क
भी
भेजा
करो
दु'आओं
के
साथ
Afzal Khan
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तुम
मेरे
दिल
में
और
मैं
बस
तुम
में
गुम
अक्सर
छत
पर
साथ
टहलते
हैं
हम
तुम
Yogendra Singh Raghuwanshi
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मैं
और
बस
मेरी
तन्हाई
हम
दोनों
प्यार
मोहब्बत
और
जुदाई
हम
दोनों
Yogendra Singh Raghuwanshi
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तेरे
हाथों
में
कंगन
बना
झूम
लूँ
तेरी
नज़रों
में
सारा
जहाँ
घूम
लूँ
प्रेम
में
तेरे
अधरों
को
क्या
चूमना
तेरे
मेहँदी
लगे
कर
कमल
चूम
लूँ
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Yogendra Singh Raghuwanshi
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लिखते-लिखते
रोक
लिया
हमने
ख़ुद
को
जैसे
तुमने
बहते
आँसू
रोके
हैं
Yogendra Singh Raghuwanshi
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साथ
तेरे
और
चल
सकता
नहीं
राख
हूँ
अब
और
जल
सकता
नहीं
आँधियाँ
आएँ
कि
अब
तूफ़ाँ
चलें
राह
अपनी
मैं
बदल
सकता
नहीं
थक
गया
हूँ
बेसबब
चलते
हुए
इश्क़
में
अब
और
चल
सकता
नहीं
जिस्म
की
बेताबियों
से
मात
खा
रूह
को
अब
और
छल
सकता
नहीं
छोड़
दूँगा
ये
जहाँ
तेरे
लिए
अब
तुझे
मैं
और
खल
सकता
नहीं
कब
तलक
पानी
से
मैं
डरता
रहूँ
बर्फ़
हूँ
पर
और
गल
सकता
नहीं
रात
से
मैं
दोस्ती
कैसे
करूँँ
सूर्य
हूँ
अब
और
ढल
सकता
नहीं
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Yogendra Singh Raghuwanshi
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