tiri mirii baat akshar jo khamoshiyon men ho gum | तिरी मेरी बात अक्सर जो ख़मोशियों में हो गुम

  - Yousuf Bin Mohammad
तिरीमेरीबातअक्सरजोख़मोशियोंमेंहोगुम
येसुकूतहैकहींपरकभीबे-ज़बानहोतुम
कोईला-ज़वालरस्तोंकीलड़ीसीज़िंदगीहै
कोईरास्तामिलेहैकोईरास्ताजोहोगुम
क्याकहूँकिबे-ज़बाँहूँपेखुलीकिताबहूँमैं
मुझेपढ़सकोतोपढ़लोजोकभीमुझेपढ़ोतुम
येअकेलीबातसीखीहैहज़ारोंमहफ़िलोंसे
जोंअकेलीज़िंदगीहैतोअकेलेहीरहोतुम
कोईबातक्याकहेंगेजोसमझसकोसमझलो
मुझेबातकरआईवोजोसुनसकोसुनोतुम
कोईइम्तिहाँख़त्महैकोईकामफिरशुरूअ'है
येजोफ़ुर्सतेंहैंपलभरकहींउनमेंहीजियोतुम
मिरीज़िंदगीकीबातेंजोरहीनहैंतुम्हारी
क्यागदागरीहैमेरीक्याकुशादाहाथहोतुम
  - Yousuf Bin Mohammad
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