nigaah-e-naaz ka haasil hai e'tibaar mujhe | निगाह-ए-नाज़ का हासिल है ए'तिबार मुझे

  - Yazdani Jalandhari
निगाह-ए-नाज़काहासिलहैए'तिबारमुझे
हवा-ए-शौक़ज़राऔरभीनिखारमुझे
कभीज़बाँखुलीअर्ज़-ए-मुद्दआकेलिए
कियाहैपास-ए-अदबनेभीशर्मसारमुझे
पुरानेज़ख़्मनएदाग़साथसाथरहे
मिलीतोकैसीमिलीदा'वत-ए-बहारमुझे
फिरअहल-ए-होशकेनर्ग़ेमेंगयाहूँमैं
ख़ुदाकेवास्तेइकबारफिरपुकारमुझे
बिखररहीहैमोहब्बतकीरौशनीहरसू
उड़ारहाहैकोईसूरत-ए-ग़ुबारमुझे
जानेकौनसाहैशो'बदातआ'क़ुबमें
किआजउसनेकहाहैवफ़ाशिआ'रमुझे
जोआपआएँतोयेफ़ैसलाभीहोजाए
दिखाईदेताहैमौसमतोख़ुश-गवारमुझे
हज़ारबारसुकून-ए-हयातकीहदमें
हज़ारबारकियादिलनेबे-क़रारमुझे
मिरेशबाबमिरीज़िंदगीमिरेमाज़ी
ज़बान-ए-हालसेइकबारफिरपुकारमुझे
वोबातजिसपेमदार-ए-वफ़ाहै'यज़्दानी'
वोबातकहनापड़ेगीहुज़ूर-ए-यारमुझे
  - Yazdani Jalandhari
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