jins-e-dil le kar bhare bazaar tak pahuncha nahin | जिंस-ए-दिल ले कर भरे बाज़ार तक पहुँचा नहीं

  - Yawar Azeem
जिंस-ए-दिललेकरभरेबाज़ारतकपहुँचानहीं
एकतकपहुँचाहूँमैंदो-चारतकपहुँचानहीं
मेरेपहलूसेगुरेज़ाँहैवोमेराख़ुश-बदन
इकहिरनहैजोअभीतातारतकपहुँचानहीं
देखनेमेंकुछनहींहैवक़्तकीयेआब-जू
कोईलेकिनउसनदीकेपारतकपहुँचानहीं
काग़ज़ोंपरहमलकीरेंखींचतेहीरहगए
सिलसिलाहर्फ़-ए-अबद-आसारतकपहुँचानहीं
उसकोदश्त-ए-ज़िंदगीमेंकोईमंज़िलकबमिली
जोग़ज़ाल-ए-वक़्तकीरफ़्तारतकपहुँचानहीं
कुछकुछवामाँदगाँकोदेपज़ीराईकाहक़
ठीकहैकोईतिरेमेआ'रतकपहुँचानहीं
तीरगीकीजोंकनेसबपीलियामेरालहू
कोईसूरजमेरेज़ख़्म-ए-तारतकपहुँचानहीं
यारउसमफ़्तूहलड़कीमेंबलाकाहुस्नथा
मेंहीबुज़दिलथाजोदिलकीहारतकपहुँचानहीं
शा'इरीकोयेशरफ़मुझसेमिला‘यावर-अज़ीम’
मैंग़ज़ललेकरकभीदरबारतकपहुँचानहीं
  - Yawar Azeem
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