KHvaab palkon pe mirii aa ke machal jaate hain | ख़्वाब पलकों पे मिरी आ के मचल जाते हैं

  - Yasmin Husaini Zaidi Nikhat
ख़्वाबपलकोंपेमिरीकेमचलजातेहैं
याकभीबनकेगुहरआँखसेढलजातेहैं
मुझकोगोशाकोईमानूससाजोलगताहै
लोगदीवारपेतस्वीरबदलजातेहैं
कलवोआलमथाकिइकजानथीदोक़ालिबथे
आजयेहैकिवोकतराकेनिकलजातेहैं
हमकोतूफ़ान-ए-हवादिसकाकोईख़ौफ़नहीं
येजोआतेहैंतोकुछहमभीबहलजातेहैं
अपनेआँगनमेंवोसूरजकेतमन्नाईहैं
जोदियादेखकेहमसेाएकाजलजातेहैं
मैंसुख़न-वरभीनहींफ़नकासलीक़ाभीनहीं
ज़ख़्महैंदिलकेजोनग़्मातमेंढलजातेहैं
  - Yasmin Husaini Zaidi Nikhat
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