mujh pe to gire khanjar tum lahu lahu kyuuñ ho | मुझ पे तो गिरे ख़ंजर तुम लहू लहू क्यूँ हो

  - Yasmin Husaini Zaidi Nikhat
मुझपेतोगिरेख़ंजरतुमलहूलहूक्यूँहो
ज़ख़्मीमेरेबाल-ओ-परतुमलहूलहूक्यूँँहो
तुमकोतोमिलेतम्ग़ेज़ोहद-ओ-पारसाईके
संगतोपड़ेमुझपरतुमलहूलहूक्यूँहो
दिलकेचाकमैंअपनेएकभीसिलपाई
हैंतुम्हारेचारा-गरतुमलहूलहूक्यूँँहो
तुमकोतोमिलारुत्बासरकेताजहोनेका
ज़ेर-ए-पाहैमेरासरतुमलहूलहूक्यूँहो
यूँँतोमुतमइनहूँमैंबे-वफ़ातुम्हेंफिरभी
सोचतीहूँयेअक्सरतुमलहूलहूलहूक्यूँँहो
रंगगुलसबा'निकहत'सबतुम्हारेहिस्सेमें
ख़ारहैंमिराज़ेवरतुमलहूलहूक्यूँहो
  - Yasmin Husaini Zaidi Nikhat
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