yaad-e-khuda se aaya na eemaan kisi tarah | याद-ए-ख़ुदास आया न ईमाँ किसी तरह

  - Yasin Ali Khan Markaz
याद-ए-ख़ुदासआयाईमाँकिसीतरह
काफ़िरबनेहममुसलमाँकिसीतरह
करतेहोवा'दाआनेकाहैआँखमुंतज़र
कबतकगुज़ारेदिनयेहैमेहमाँकिसीतरह
आज़ादइश्क़-ए-यारनेहमकोबनादिया
माल-ओ-मता'काहूँमैंख़्वाहाँकिसीतरह
पीतेरहोशराबजहाँतककिहोसके
शाग़िलछूटेसाक़ीकादामाँकिसीतरह
जावेंगरनसीबसेआलमहैनज़्अ'का
निकलेहमारेदिलकेभीअरमाँकिसीतरह
मरजाऊँउनकेतीर-ए-निगहसेनजातहो
गर्दनपेमेरेउनकाहोएहसाँकिसीतरह
ज़िंदाँहैंफँसगयादिल-ए-मुज़्तरनिगाहके
बैठेहैंपासबाँबनेमिज़्गाँकिसीतरह
बअ'द-ए-फ़नाभीक़ब्रकोमिस्मारकरदिया
इज़हार-ए-रंजकाहोसामाँकिसीतरह
अदवारमेंअगरचेहै'मरकज़'घिराहुआ
छोड़ेतुझकोरहमतसुब्हाँकिसीतरह
  - Yasin Ali Khan Markaz
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