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Yashvardhan Mishra 'Hind'
rakh liya tha maine roza jaañ tumhaare naam ka
rakh liya tha maine roza jaañ tumhaare naam ka | रख लिया था मैंने रोज़ा जाँ तुम्हारे नाम का
- Yashvardhan Mishra 'Hind'
रख
लिया
था
मैंने
रोज़ा
जाँ
तुम्हारे
नाम
का
तुम
को
देखा
ख़्वाब
में
औ
मेरी
सेहरी
हो
गई
- Yashvardhan Mishra 'Hind'
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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चुरायगा
उसी
से
आँख
क़ातिल
ज़रा
सी
जान
जिस
बिस्मिल
में
होगी
Dagh Dehlvi
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वरना
तो
बेवफ़ाई
किसे
कब
मुआ'फ़
है
तू
मेरी
जान
है
सो
तुझे
सब
मुआ'फ़
है
क्यूँ
पूछती
हो
मैंने
तुम्हें
माफ़
कर
दिया
ख़ामोश
हो
गया
हूँ
मैं
मतलब
मुआ'फ़
है
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Vikram Gaur Vairagi
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अपने
होटों
की
ये
तहरीर
रखो
अपने
पास
हम
वो
'आशिक़
हैं
जो
आँखों
को
पढ़ा
करते
हैं
Meem Alif Shaz
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अभी
तो
जान
कहता
फिर
रहा
है
तू
तुझे
हम
हिज्र
वाले
साल
पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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मेरी
ही
जान
के
दुश्मन
हैं
नसीहत
वाले
मुझ
को
समझाते
हैं
उन
को
नहीं
समझाते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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इश्क़
माशूक़
इश्क़
'आशिक़
है
यानी
अपना
ही
मुब्तला
है
इश्क़
Meer Taqi Meer
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इतनी
मिलती
है
मिरी
ग़ज़लों
से
सूरत
तेरी
लोग
तुझ
को
मिरा
महबूब
समझते
होंगे
Bashir Badr
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अजीब
हालत
है
जिस्म-ओ-जाँ
की
हज़ार
पहलू
बदल
रहा
हूँ
वो
मेरे
अंदर
उतर
गया
है
मैं
ख़ुद
से
बाहर
निकल
रहा
हूँ
Azm Shakri
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पहले
लगा
था
हिज्र
में
जाएँगे
जान
से
पर
जी
रहे
हैं
और
भी
हम
इत्मीनान
से
Ankit Maurya
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और
हम
को
चाहिए
क्या
ईद
पे
ईदी
भला
आप
हम
को
दीजिए
बस
एक
बोसा
गाल
पे
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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इस
क़दर
हावी
है
तिरी
वहशत
चाँद
देखूँ
तो
तू
नज़र
आए
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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रात
दिन
जिस
को
तू
हर
दम
सोचती
है
क्या
वही
इक
शख़्स
तेरी
ज़िंदगी
है
देख
कर
तस्वीर
तेरी
सोचता
हूँ
ईद
से
पहले
मुझे
ईदी
मिली
है
रात
सारी
कट
गई
ये
सोचने
में
क्या
उसे
मुझ
से
मोहब्बत
आज
भी
है
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Yashvardhan Mishra 'Hind'
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आज
निकले
हैं
तिरे
दीदार
को
तू
गिरा
दे
शर्म
की
दीवार
को
वो
अगर
तस्वीर
अपनी
भेज
दें
फ़ील
मिलता
फिर
सही
बीमार
को
शहर
जिस
दिन
मैं
चला
फिर
ले
लिया
मैंने
अपने
साथ
घर
के
प्यार
को
याद
हम
को
है
अभी
भी
वो
घड़ी
मैंने
छोड़ा
था
अना
में
चार
को
फ़ोन
नंबर
और
फ़ोटो
सब
दिया
ब्लॉक
जाने
क्यूँ
किया
फिर
यार
को
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Yashvardhan Mishra 'Hind'
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बस
इसी
बात
की
ख़ुशी
है
अभी
वो
परी
मुझ
को
चाहती
है
अभी
उस
तरफ़
जिस्म
का
किनारा
है
सामने
इश्क़
की
नदी
है
अभी
वस्ल
के
सीन
की
तवक़्क़ो
है
हिज्र
की
फ़िल्म
चल
रही
है
अभी
वक़्त
अच्छा
कभी
तो
आएगा
मुंतज़िर
हाथ
की
घड़ी
है
अभी
ख़ुद-कुशी
फिर
कभी
सही
ऐ
दिल
ज़िंदगी
तो
बहुत
पड़ी
है
अभी
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Yashvardhan Mishra 'Hind'
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