tazaad achha nahin tarz-e-bayaan ka ham zabaanon men | तज़ाद अच्छा नहीं तर्ज़-ए-बयाँ का हम ज़बानों में

  - Yaqoob Usmani
तज़ादअच्छानहींतर्ज़-ए-बयाँकाहमज़बानोंमें
हक़ीक़तकोछुपाताजारहाहूँदास्तानोंमें
सभीतोआजबरगश्ताहैंअज़्मत-सोज़पस्तीसे
मचारक्खीहैइकहलचलज़मींनेआसमानोंमें
समझताहूँमैंबे-मफ़्हूमसीआवाज़शिकवेको
मुसीबतख़ुदमददकरतीहैकरइम्तिहानोंमें
मिराआईना-ए-एहसासहैराँहोनहींसकता
यक़ींकानूरपैदाकरहीलेताहैगुमानोंमें
बनारखाहैबद-तरअज़क़फ़सख़ौफ़-ए-असीरीने
सिवातिनकोंकेअबक्यारहगयाहैआशियानोंमें
नयाइकमा'बद-ए-उम्मीदभीता'मीरकरनाहै
अनादिलमोतकिफ़कबतकरहेंगीगुलिस्तानोंमें
मिरीनैरंगियाँछानेलगीहैंरंग-ए-महफ़िलपर
बहुतकुछफ़र्क़'याक़ूब'चलाहैदास्तानोंमें
  - Yaqoob Usmani
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