कईबारएकबातबारबारभीबोलूँ,
तोसुनलेनाकिकहनातोऐसाहीकुछथा,
परज़ेहनकुछगढ़तानगीनेसुनहरे,
उससेेपहलेहीतुमसेे
बातकरनेकीज़रूरतनेशब्दोंकेबाज़ारमेंसबकेआगे
हमारीज़बानखींचली!
जैसेसरस्वतीकोख़बरहोगई,
किविभातफिरसेअपनीजानेजहाँको,
तुझहमनवाको,
अपनीमल्लिकाको,
कुछकहनेचलाहै,दिलपरपूराज़ोरदेकर,
औरवो,आकरमेरीज़बानपरबैठकरमुझसेेबोलीं,
"नहींनहीं!यहाँतोनदूंगीतूझेशब्दोंकाजादू,
नकरूँँगीफराहमएहसासोंकीख़ुशबू,
सारेज्ञानकोढकलूंगी,जा!
अबबोलकेदिखा...बोलपाएगाकुछ?"
औरमेरेमुँहसेजानाँ!यूँनोनाआईलवयूँहीनिकला!
हमेशाकीमानिंद!
कोईबातनहींजोतुम्हेंइससेेअबकेकुछफी़लनहुआ,
औरतुमनेजवाबमेंकुछनकहा,
क्लिशेहीहैये!परइसक्लिशेकीकहानीसुनादीहैतुमको,
औररिवाज़केमुताबिकसौरीकहाहै!
तुम्हाराविभात