Vibhat kumar

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@vibhat-kumar

Vibhat kumar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vibhat kumar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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दु'आ
आओकाफ़िरों!हाथउठाएँ
आसहमसबसाथउठाएँ
हरमज़हबकेदुतकारेलोग
सबतरहसेनाकारेलोग
हमवोकाफ़िरहैंजिनको
मंदिरनेघुसनेनहींदिया
हमवोकाफ़िरहैंजिनको
मस्जिदमेंपनाहनहींमिली
हमवोकाफ़िरहैंजिनने
ख़ुदाकीनफ़ीमेंशे'रपढ़े
कभीमज़ाक़बनायाहमने
बंदोंपरतंज़अनेककहे
अबभीहमवोकाफ़िरहैं
ख़ुदाजिनकाहैहीनहीं
परअबजबकुछतयहीनहीं
किकबतकलोगमरेंगेअब
औरवोजोरोज़ीकेमारेहैं
बचगएतोक्याकरेंगेअब
आओ,मेरेकाफ़िरकितुम्हें
आजहरमनेयादकियाहै
नमाज़ोंकाअसरनहींदिखता
दीएंजलकरराखहुए
आओहाथउठातेहैं
दु'आकरतेहैं
मानाकेख़ुदानहींहोता
दु'आकरें,आवाज़बनें
बीमारोंकीसांसबनें
वोसाइंसदाँजोहवाबनारहे
वोड्राइवरजोबीमारउठारहे
आओघरबैठकरदु'आकरें
दु'आकिदुनियाठीकहोजाए
कोईभीशख़्समरेनहींअब
मानाकियेभीज़्यादाहै
दुनियाकीसांसअबआधाहै
जिसकेघरयेडाइनगई
हरशख़्सवहाँबिलखताहै
घरकेघरबीमारहुए
आओकाफ़िरोंफिरइकबार
तुमइकइकआँसूहीदेदो
इनइकइकआँसूसेशायद
दु'आकुबूलहीहोजाए
रोनेकीरस्मनिभाईजाए
येमरतीधरतीबचाईजाए
हरतकहवापहुँचपाए
हरतकदु'आपहुँचपाए
आओनाइकसाथउठाएँ
आओकाफ़िरों!हाथउठाएँ
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Vibhat kumar
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क्यायेअंतिमवक़्तनहीं
सुब्हसुब्हसीहोतीनहीं
शामोंमेंबेचैनीरहतीहै
सिम्पटमसिम्पटमरटतेहैं
क्याहोताहैक्यानहींहोता
क्याकरनाऔरक्यानहींकरना
जीनाकैसेऔरजीतेरहना
येजीवनहैज़ब्तनहीं
क्यायेअंतिमवक़्तनहीं
पत्तेपत्तेपरहैख़तरा
फूलफूलपरमौतकीगंध
वोक़ुदरतपरलिखनेवाले
आजहैंख़ुदकमरेमेंबंद
जोमालीथेभागगए
सपनेदेकरजागगए
मुझसेेक्यापूछेहोतुम
मैंतेरेजैसाफ़र्दनहीं
क्यायेअंतिमवक़्तनहीं
किसीकोहवानहींपहुँची
किसीकोदवानहींपहुँची
किसीकोदु'आनहींपहुँची
तुमकैसेहोअच्छेहो
मैंअच्छाहूँ!परकबतक
शायदयेअंतिमवक़्तहीहै
औरबड़ासख्तभीहै
मैंतुमसेेइकबातकहूँ
"स्मृति,मैंनेतुमसेेइश्क़किया
औरकभीनहींछोड़ाइश्क़
मुश्किलसेमुश्किलवक़्तमेंभी
ख़ुदापरय़कीनकभीनहीं
तुमपरय़कीनसदाहीकिया
शायदकभीनहींकहपाऊँतुमसेे
तुमरहोपरमैंरहूँ
मैंरहूँपरतुमरहो
जान!मैंनेबसएककामसहीसेकिया
ईमानदारीयेइश्क़किया
बसइसदिनकेलिएकिलौटआओतुम
नहींआओगीमालूमहै
तुममुझअंधेकीलाठीथी
मेरेसाथरहनेकाशुक्रिया
मुझेराहदिखानेकाशुक्रिया
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Vibhat kumar
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उसलड़कीकेमाथेपे
थेकुछदाग़बचपनके,
उसेमालूमथाकेनहीं
मालूमनहींमुझको,
परवोदाग़मुझकोआएदिनहैरानकरतेथे,
गालोंकेआसपासतोबचपनकामौसमथा,
औरगालोंसेनीचेहवसजानदेतीथी,
सोमुझकोयादनहींकितब
नीचेकौनसामौसमगुज़रताथा,
परलड़कीकेमाथेपरजोदाग़थे,
उसेबहुतआमलगतेथे,
प'मुझकोमालूमहैइतना
किवोहीदाग़थेजोथे,
मानोसभीबुरीयादकीकीलें
ठोकीगईहोमाथेपर,
मैंउसेसमझानहींपाया,
केइनकोसम्भालकररखना!
भलेमुझकोइननिशानोंकोछूनेकी
अबइजाज़तनहीं,
मगरजिनकोभीइजाज़तदो,
उसेमालूमहोजाए,
केतेरामाथाईसाकेलिए,
क्राॅसबनताथा,
केतेरेमाथेकोचूमनेवालाआदमी
ईश्वरकोपूजेगा!
कितेरेदाग़मेंहीहैरतसांसलेतीहै,
कितेरेजिस्ममेंकुछऔरहैहीनहींछूनेको,
जिसपरग़ौरकरतेहम,
मगरवोदाग़बचपनके,
मेरीजाँ!वहीदाग़बचपनके,
तुमकोसुन्दरबनातेथे!!!
औरोंसेबेहतरबनातेथे!!!
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Vibhat kumar
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कईबारएकबातबारबारभीबोलूँ,
तोसुनलेनाकिकहनातोऐसाहीकुछथा,
परज़ेहनकुछगढ़तानगीनेसुनहरे,
उससेेपहलेहीतुमसेे
बातकरनेकीज़रूरतनेशब्दोंकेबाज़ारमेंसबकेआगे
हमारीज़बानखींचली!
जैसेसरस्वतीकोख़बरहोगई,
किविभातफिरसेअपनीजानेजहाँको,
तुझहमनवाको,
अपनीमल्लिकाको,
कुछकहनेचलाहै,दिलपरपूराज़ोरदेकर,
औरवो,आकरमेरीज़बानपरबैठकरमुझसेेबोलीं,
"नहींनहीं!यहाँतोदूंगीतूझेशब्दोंकाजादू,
करूँँगीफराहमएहसासोंकीख़ुशबू,
सारेज्ञानकोढकलूंगी,जा!
अबबोलकेदिखा...बोलपाएगाकुछ?"
औरमेरेमुँहसेजानाँ!यूँनोनाआईलवयूँहीनिकला!
हमेशाकीमानिंद!
कोईबातनहींजोतुम्हेंइससेेअबकेकुछफी़लहुआ,
औरतुमनेजवाबमेंकुछकहा,
क्लिशेहीहैये!परइसक्लिशेकीकहानीसुनादीहैतुमको,
औररिवाज़केमुताबिकसौरीकहाहै!
तुम्हाराविभात
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