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Vibhat kumar
dua
dua | दु'आ
- Vibhat kumar
दु'आ
आओ
काफ़िरों!
हाथ
उठाएँ
आस
हम
सब
साथ
उठाएँ
हर
मज़हब
के
दुतकारे
लोग
सब
तरह
से
नाकारे
लोग
हम
वो
काफ़िर
हैं
जिनको
मंदिर
ने
घुसने
नहीं
दिया
हम
वो
काफ़िर
हैं
जिनको
मस्जिद
में
पनाह
नहीं
मिली
हम
वो
काफ़िर
हैं
जिनने
ख़ुदा
की
नफ़ी
में
शे'र
पढ़े
कभी
मज़ाक़
बनाया
हमने
बंदों
पर
तंज़
अनेक
कहे
अब
भी
हम
वो
काफ़िर
हैं
ख़ुदा
जिनका
है
ही
नहीं
पर
अब
जब
कुछ
तय
ही
नहीं
कि
कबतक
लोग
मरेंगे
अब
और
वो
जो
रोज़ी
के
मारे
हैं
बच
गए
तो
क्या
करेंगे
अब
आओ,
मेरे
काफ़िर
कि
तुम्हें
आज
हरम
ने
याद
किया
है
नमाज़ों
का
असर
नहीं
दिखता
दीएं
जल
कर
राख
हुए
आओ
हाथ
उठाते
हैं
दु'आ
करते
हैं
माना
के
ख़ुदा
नहीं
होता
दु'आ
करें
,आवाज़
बनें
बीमारों
की
सांस
बनें
वो
साइंसदाँ
जो
हवा
बना
रहे
वो
ड्राइवर
जो
बीमार
उठा
रहे
आओ
घर
बैठकर
दु'आ
करें
दु'आ
कि
दुनिया
ठीक
हो
जाए
कोई
भी
शख़्स
मरे
नहीं
अब
माना
कि
ये
भी
ज़्यादा
है
दुनिया
की
सांस
अब
आधा
है
जिसके
घर
ये
डाइन
गई
हर
शख़्स
वहाँ
बिलखता
है
घर
के
घर
बीमार
हुए
आओ
काफ़िरों
फिर
इक
बार
तुम
इक
इक
आँसू
ही
दे
दो
इन
इक
इक
आँसू
से
शायद
दु'आ
कुबूल
ही
हो
जाए
रोने
की
रस्म
निभाई
जाए
ये
मरती
धरती
बचाई
जाए
हर
तक
हवा
पहुँच
पाए
हर
तक
दु'आ
पहुँच
पाए
आओ
ना
इक
साथ
उठाएँ
आओ
काफ़िरों!
हाथ
उठाएँ
- Vibhat kumar
प्यार
की
जोत
से
घर
घर
है
चराग़ाँ
वर्ना
एक
भी
शम्अ
न
रौशन
हो
हवा
के
डर
से
Shakeb Jalali
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फूल
ही
फूल
याद
आते
हैं
आप
जब
जब
भी
मुस्कुराते
हैं
Sajid Premi
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दोस्त
अपना
हक़
अदा
करने
लगे
बेवफ़ाई
हमनवा
करने
लगे
मेरे
घर
से
एक
चिंगारी
उठी
पेड़
पत्ते
सब
हवा
करने
लगे
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Santosh S Singh
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साथ
चलते
जा
रहे
हैं
पास
आ
सकते
नहीं
इक
नदी
के
दो
किनारों
को
मिला
सकते
नहीं
उसकी
भी
मजबूरियाँ
हैं
मेरी
भी
मजबूरियाँ
रोज़
मिलते
हैं
मगर
घर
में
बता
सकते
नहीं
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Bashir Badr
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तुझे
भूल
जाने
की
कोशिशें
कभी
कामयाब
न
हो
सकीं
तिरी
याद
शाख़-ए-गुलाब
है
जो
हवा
चली
तो
लचक
गई
Bashir Badr
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सभी
रिश्तें
मैं
यूँँ
बचाए
हूँ
जैसे
तड़पते
दियों
को
हवा
देते
रहना
Parul Singh "Noor"
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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मेरा
हाथ
पकड़
ले
पागल,
जंगल
है
जितना
भी
रौशन
हो
जंगल,
जंगल
है
Umair Najmi
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मैं
चोट
कर
तो
रहा
हूँ
हवा
के
माथे
पर
मज़ा
तो
जब
था
कि
कोई
निशान
भी
पड़ता
Abhishek shukla
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सब
दुखों
का
ये
समुंदर
पार
होगा
जब,
सभी
आफ़तों
के
पत्थरों
पर
नाम
होगा
राम
का
Shoonya Shrey
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