हिसाब-ए-दोस्ताँदर-दिलनहींअब
पलटनाबातोंसेमुश्किलनहींअब
कियाकरतेथेजोजाँभीनिछावर
भरोसेकेभीवोक़ाबिलनहींअब
समुंदरकीहदेंबढ़नेलगीहैं
नज़रआताकहींसाहिलनहींअब
रहेथेजोशरीक-ए-ग़मशब-ओ-रोज़
ख़ुशीदेखीतोवोशामिलनहींअब
क़हरढातारहाजोहुस्न-ए-जानाँ
बहुतअफ़्सोसवोक़ातिलनहींअब
बुराईकरनाला-हासिलहैलगता
सुनेंदोकानजोफ़ाज़िलनहींअब
बनेंबेहतरभीअबइंसानकैसे
बनानेकोवोआब-ओ-गिलनहींअब
भलातयभीहोयेरस्तातोकैसे
निगाहोंमेंकोईमंज़िलनहींअब
तसाहुलछोड़िएवक़्त-ए-अमलहै
गुज़रपाएगीयूँँकाहिलनहींअब
करेंक्याज़िंदगीक़ुर्बानउसपर
रहाजोज़ीस्तकाहासिलनहींअब