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Top 10 of
Murli Dhakad
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Murli Dhakad
ये
हमें
किसने
वर्चस्व
की
लड़ाई
दी
जो
है
ही
नहीं
उसे
खोते
हम
हैं
है
सारी
रात
का
दर्द
हम
कुत्तों
को
हो
कोई
उदास
रोते
हम
हैं
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ये
कैसा
तजुर्बा
है
कि
दिल
जलाने
पे
अक्सर
अँधेरा
छा
जाता
है
रोशनी
नहीं
होती
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मेरे
नशेमन
में
किसी
तरह
का
अँधेरा
नहीं
है
उस
ख़्वाब
में
न
जी
पाऊँगा
जो
मेरा
नहीं
है
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हम
सेे
क्या
मान
सम्मान
की
बातें
'रिंद'
हमने
शराब
के
लिए
किताबें
बेची
है
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दुनिया
का
तो
पता
नहीं
आदमी
एक
बहाना
है
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मुजाहिद
की
दास्तान
है
ख़्वाब
मेरे
उम्र
भर
की
थकान
है
ख़्वाब
मेरे
परिंदे
तो
सभी
है
पिंजरों
में
क़ैद
पतंगों
का
आसमान
है
ख़्वाब
मेरे
जहाँ
सभी
मुसाफिर
थक
हार
के
पहुंचे
जन्नतों
का
शमशान
है
ख़्वाब
मेरे
मैं
इस
मकाँ
से
उस
मकाँ
में
दर-ब-दर
दीवारों
के
दरमियान
है
ख़्वाब
मेरे
रात
भी
बदल
के
सुब्ह
हो
गई
अब
तलक
वीरान
है
ख़्वाब
मेरे
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परिंदे
की
परवाज
सुनाई
दी
है
गगन
में
कोई
आवाज
सुनाई
दी
है
ये
कांसा
टूटा
या
दिल
था
किसी
का
सिक्कों
के
बिखरने
की
आवाज
सुनाई
दी
है
मैं
सोचता
था
दिल
धड़कता
तो
होगा
मुद्दतों
बाद
आज
आवाज
सुनाई
दी
है
मैं
जब
भी
किसी
अनजान
शहरस
गुजरा
मुझे
एक
जानी
पहचानी
आवाज
सुनाई
दी
है
याद
तुम्हारी
बारहा
तो
नहीं
आई
मगर
मुझे
अक्सर
तुम्हारी
आवाज
सुनाई
दी
है
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इसी
उलझन
में
उम्र
सारी
बसर
की
ये
छाया
सूरज
की
है
या
शजर
की
एक
दिन
मैं
अपने
घर
महमान
हुआ
ताक
पर
रख
दी
आवारगी
ज़िन्दगी
भर
की
मैंने
हादसों
से
अपनी
झोली
भर
ली
जैसे
कमाई
हो
किसी
लंबे
सफ़र
की
कोई
इतना
मुतमईन
कैसे
हो
सकता
है
जाम
भी
ना
लिया
ज़िन्दगी
भी
बसर
की
दिन
तो
कयामत
था
गुज़ारा
नहीं
गया
रात
तो
ज़िन्दगी
थी
सो
बसर
की
हाँ
फसाना
तो
मैं
भूल
गया
लेकिन
कुछ
गलियां
याद
है
तेरे
शहर
की
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हम
सबको
इसी
हैरत
में
मर
जाना
है
कि
मरके
फिर
किधर
जाना
है
अच्छा
हो
गर
हो
बैचेनी
का
कोई
सबब
ये
क्या
कि
पता
ही
नहीं
क्या
पाना
है
मेरे
पास
रखे
हैं
बहुत
से
काग़ज़
के
फूल
क्या
तुम्हारी
नजर
में
कोई
बुतखाना
है
एक
तो
गिला
न
कर
सका
बारिशों
का
और
उस
पर
शौक
तो
ये
है
कि
नहाना
है
क्या
कभी
शाम
की
आँखों
में
तुमने
डूबते
सूरज
के
दर्द
को
पहचाना
है
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तुम्हारी
आँखों
से
मैं
ख़ूब-सूरत
हूँ
वरना
चाँद
की
अपनी
कोई
रोशनी
नहीं
होती
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